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5 बातें जो मोदी के फैसले पर शक पैदा करती हैं

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आखिर कौन से हैं वो कारण जो मोदी की नोटबंदी स्कीम पर शक करने को मजबूर करते हैं? क्यों पूरी तरह से यकीन नहीं हो रहा है करंसी बैन के सच पर?

जबसे मोदी जी ने नोटबंदी का फैसला लिया है लोग बौखला गए हैं. कुछ लोग इसके समर्थन में हैं, कुछ इसका विरोध कर रहे हैं और कुछ को लगता है कि जो हो रहा है उसे होने दिया जाए. ऐसे में आईचौक के फेसबुक पेज पर कई पोस्ट आ रहे हैं. इसी में से एक पोस्ट पर प्रिंस राजा ने मोदी की की स्कीम पर सवाल उठाए हैं.

Modi

पोस्ट कुछ इस प्रकार है-
नोट बंद करने के लिए तीन तर्क दिए जा रहे हैं, पहला अर्थव्यवस्था रेगुलेटेड होगी, दूसरा काला धन बाहर आएगा और काला धन वालों को पकड़ा जायेगा और तीसरा नकली नोट चलन से बाहर किये जाएंगे ! अगर यह तीन बातें हो तो इसको पूरा समर्थन है. लेकिन 500 और 1000 के नोट बंद करने के फैसले पर कुछ ज़रूरी बात जिनपर विचार होना चाहिए.

1. सौ से कम बड़े कॉर्पोरेट घरानों (ख़रबपतियों) पर बैंक का 12 लाख करोड़ क़र्ज़ है. यह हम सब जानते हैं कि यह पैसा किसी सरकार, मंत्री या बैंक की अपनी सम्पत्ति नहीं है. यह आम जानता की गाढ़ी कमाई का पैसा है, जिसका ब्‍याज एक लाख चौदह हज़ार करोड़ इस साल बजट में माफ़ कर दिया गया. अगर सच में मोदी को आम जनता के हित में काले धन की चिंता है तो क्यों यह व्याज माफ़ किया जा रहा है. क्यों यह क़र्ज़ नहीं वसूला जा रहा है?
 

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 सांकेतिक फोटो
 

2. यह पूरा अभियान विदेशों से काला धन न ला पाने, सबके खाते में 15 लाख का वादा पूरा न कर पाने की नाकामी को छुपाने का प्रयास है. वे जो ब्लैकमनी होल्डर हैं (असली / बड़े वाले ) उनपर कार्यवाई तो दूर आप सुप्रीम कोर्ट तक के पूछने पर उन लोगों के नाम उजागर नहीं करते. यही है आपका साहस ?

3. अब यहाँ विचार कीजिये कि यह खेल आखिर है क्या ? 12 लाख करोड़ बैंक का कॉर्पोरेट्स के पास फंसा है, और उन कॉर्पोरेट्स के हितों की रखवाली मोदी सरकार द्वारा उसका ब्‍याज भी माफ़ कर दिया जा रहा है. अब पूँजी के इस बढ़ते संकट से निपटने के लिए बहुत ज़रूरी है कि किसान ,मजदूर, खोमचे वाले, पटरी दुकानदार, तीसरी चौथी श्रेणी का कर्मचारी, आम महिलाएं और मध्यम वर्ग के पास रखे पैसे को बैंक में एक झटके में जमा कराया जाये. जिससे बैंक के पास फिर से पूँजी एकत्र हो और सरकार फिर कॉर्पोरेट्स को कर्ज दिलवा सके.

4. सबसे ख़राब स्थिति यह है कि करीब पाँच करोड़ लोग खुद और परिवार की बेहद ज़रूरी ज़रूरतों (दवा, सब्ज़ी, आटा, चाय, दूसरी खुदरा चीज़ों) के लिये बेवजह सताये गये हैं. वे भोर से बैंकों, पोस्ट आफिसों की लाइनों में खड़े रहे. अपने ही कमरतोड़ मेहनत से कमाए अपने पैसे को अपने ऊपर खर्च करने के लिए भीख की तरह लेने के लिए ! इनमें से शायद ही कोई वो हो जिसको पकड़ने के लिये ये नोटबंदी की स्कीम लाई गई है. कितने मजदूर, पटरी दुकानदारों के यहाँ चूल्हा तक नहीं जला उसकी ज़िम्मेदारी कौन लेगा ?

5. नोटबंदी के लिए ज़ारी किये गए तुगलकी सरकारी आदेश में यह भी शर्त लगायी है कि अगर किसी के खाते में आज से लेकर 30 दिसम्बर तक 2.5 लाख से ज्यादा पैसा जमा हुआ तो वोह जांच के घेरे में आएगा और उस पर दो सौ परसेंट पेनालिटी लगायी जाएगी. अच्छा मजाक है मेहनत से, इमानदारी से सचाई से अगर पैसा कमाया है और उसमे से अपना पेट काटकर (जो प्राय: आम किसान और मजदूर परिवारों और निम्न मध्य वर्ग में होता रहा है) पाँच सात, १० लाख जोड़ ले, या पत्नियों द्वारा सालों साल पतियों से मिलने वाले घर खर्च में से बचा कर जो पूँजी आज एकत्र की हो वह काला धन हो जाएगी ? सबको पता है काला धन कोई नकद में नहीं रखता होगा.

ऊपर लिखी सारी मुसीबत अगर आम जानता झेल भी लेती है तब भी सवाल वही रहेगा कि, क्यों ? और किसलिए ? इससे आम जनता को क्या मिलेगा ? महगाई कम होगी ? आमदनी बढ़ेगी ? खाते में 15 लाख आएगा ? शिक्षा , खेती , चिकित्‍सा में सब्सिडी मिलेगी या मुफ्त हो जायेगा ? या आम जनता को भूखा मार कर, परेशान करके बड़े कॉर्पोरेट घरानों के हितों की रक्षा की जाएगी ?

 

इस लेख में लेखक ने अपने निजी विचार व्यक्त किए हैं.

Courtesy: ichowk.in

बिहार में धर्मेंद्र सिंह की हत्‍या के खिलाफ़ आज पत्रकारों का काला दिवस

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सासाराम में अपराधियों की गोली का शिकार बने पत्रकार धर्मेंद्र सिंह की हत्या के विरोध में बिहार के पत्रकार सोमवार को काला दिवस मनाएंगे।

बिहार प्रेस मेंस यूनियन के प्रदेश अध्यक्ष एसएन श्याम ने बताया कि सोमवार को पूरे राज्य भर के पत्रकार काला दिवस मनाने के साथ ही पटना के गांधी मैदान के समीप करगिल चौक से पत्रकार प्रतिरोध मार्च निकालेंगे। यहां करगिल चौक पर स्वर्गीय पत्रकार को श्रद्धांजलि भी दी जाएगी।

Bihar journalist attack

यूनियन ने बयान जारी कर कहा है कि रोहतास के एसएसपी और शाहाबाद रेंज के डीआईजी द्वारा स्व. पत्रकार को अपराधी बताया जाना शर्मनाक है। यूनियन ने कहा है कि सासाराम में पत्रकार की हत्या पत्थर माफियाओं और सासाराम जेल में बंद एक कैदी के इशारे पर हुई है।

Courtesy: Media Vigil

बीजेपी नेता का विवादित बयान कहा ‘लोग तो राशन की लाइन में भी मर सकते हैं’

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मोदी सरकार के 500 व 1000 रुपये के नोट बन्द करने से सबसे ज्यादा परेशानी झेल रहे मध्यम वर्ग के लोग बैंकों की कतारों में मुश्किलों का सामना कर रहे हैं और उनमें से कई लोगों की जान भी जा चुकी है लेकिन भाजपा के नेताओं को इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता।

नोट बदलवाने के लिए बैंकों और एटीएम के बाहर लंबी कतारें लग रही हैं। घंटों लाइन में लगने से लोग परेशान और बीमार हो रहे हैं।

हाल ही में रिटायर्ड कर्मी की बैंक में लाईन लगने के दौरान मौत हो गई। इस मामले में जब भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं मप्र प्रभारी डॉ. विनय सहस्रबुद्धे से पूछा गया तो उन्होंने एक विवादित बयान दे दिया।

हिन्दुस्तान टॉइम्स की खबर के अनुसार, उन्होंने कहा कि लोग तो राशन की लाइन में भी मर सकते हैं। विनय सहस्रबुद्धे ने सोमवार को भोपाल में जनसंपर्क मंत्री डॉ. नरोत्तम मिश्र के निवास पर पत्रकारों से चर्चा के दौरान ये बात कही। उन्होंने कहा कि देश में कालेधन के खिलाफ संघर्ष चल रहा है।

जनता सत्याग्रही के रूप में थोड़ा कष्ट सहे। ये केवल एक कानूनन निर्णय नहीं, जन आंदोलन है। उन्होंने भाजपा कार्यकर्ताओं से आग्रह किया कि वे जनता की मदद करें। उन्होंने कहा कि लोग बहुत हड़बड़ी में काम कर रहे हैं, मैं उनसे कहना चाहता हूं कि अभी बहुत समय है सब आराम से अपना काम करवाए।

Courtesy: Janta Ka Reporter

मथुरा के गोवर्धन मंदिर में धर्म के नाम पर नोट बदलने का अधर्म: ABP न्यूज़

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 एक विशेष खबर के द्वारा एबीपी न्यूज़ चैनल ने भांडा फोड़ा है कि किस तरह मथुरा के गोवर्धन मंदिर में चल रहा है "धर्म के नाम पर नोट बदलने का अधर्म"!

जबकि एक ऒर सारे देश में 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को बदलने में जनता की लंबी लाइनें  देखने को मिल रही हैं, कुछ तो जान तक खो बैठे हैं, वहीं दूसरी ऒर ABP न्यूज़ के ख़ुफ़िया कैमरा ने कैद कर लिये हैं मथुरा के मंदिर के  दृश्य जहां बड़ी आसानी से लोग पुजारी को 500 और 1000 रुपये के नोट और कुछ ही देर में उन्हें 100-100 रुपये के नोट वापस मिल जाते हैं. इस सेवा की फीस है 20%. यानि 1000 रुपये के बदले 800।

इतना ही नहीं ABP न्यूज़ के रिपोर्टर ने जब यह पूंछा कि क्या वह 50 लाख मूल्य के पुराने नोट भी बदलवा सकते हैं तो जवाब में पुजारी ने कहा हाँ मगर एक साथ नहीं — 7-7, 10-10 लाख करके।

ध्यान रहे की मंदिरों में दान इकठ्ठा हुए पैसों पर इनकम टैक्स लागू नहीं होता।

देखिये इस एबीपी के विडियो को: