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सवर्णों की बपौती हैं भगवान! मंदिर जाने पर दलित को जिंदा जलाया

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हमीरपुर। क्या मंदिर सिर्फ सवर्णों की बपौती है या हिन्दुओं के भगवान सिर्फ सवर्णों की पूजा स्वीकार करते हैं? पिछले दिनों बिहार में लक्ष्मी पूजा करने पर सवर्ण जाति के लोगों ने महादलितों की पिटाई कर दी थी यही नहीं उनके घरों पर पथराव भी किया था। अब ऐसी ही एक घटना यूपी के बुंदेलखंड से सामने आई है जहां एक सवर्ण ने मंदिर जाने पर एक दलित बुजुर्ग की आग लगाकर हत्या कर दी।

TEMPLE

बुंदेलखंड के हमीरपुर जिले में बुधवार शाम मंदिर जा रहे एक दलित बुजुर्ग को अगड़ी जाति के शख्स ने वहां जाने से रोका। बताया जाता है कि रोके जाने के बावजूद न मानने पर पहले उसके सिर पर कुल्हाड़ी मारी, फिर मौके पर ही जिंदा जला दिया।
 
प्राप्त जानकारी के अनुसार 90 वर्षीय छिम्मा अपने बेटे, भाई और पत्नी के साथ अपने बुजुर्गों को पिण्डदान करने गांव जा रहे थे। परंपरा के अनुसार गांव के बाहर बने मैदानी बाबा के मंदिर पहुंचे जहां पर संजय तिवारी मिला जिसने उन्हें मंदिर में जाने से रोका। छिम्मा उसकी बातों को नजरअंदाज कर आगे बढ़े तो संजय ने उनके सिर पर कुल्हाड़ी से कई वार कर घायल कर दिया और बाद में कैरोसिन डाल कर जला दिया।
 
आरोपी संजय तिवारी छिम्मा को जलाने के बाद वहां से भाग गया जिसे आसपास के लोगों ने काफी देर बाद पकड़ा और पुलिस को सूचना दी। जलालपुर थाने के एसओ रामाश्रय यादव के अनुसार, आरोपी को हत्या की धाराओं में गिरफ्तार कर लिया गया है। 

Courtesy: National Dastak

संस्कृति बोर्ड का पुनर्गठन, भाजपा की ओर झुकाव वाले सदस्य किए गए शामिल

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राजग सरकार ने संस्कृति संबंधी केंद्रीय सलाहकार बोर्ड को पुनर्गठित करते हुए इसके सदस्यों की संख्या बढ़ाकर दोगुनी से भी अधिक कर दी है तथा नए सदस्यों में अधिकतर भाजपा के प्रति झुकाव रखने वाले लोग हैं।

पैनल के सदस्यों में भाजपा सांसद किरण खेर के पति और सरकार के मुखर समर्थक अनुपम खेर, मशहूर शास्त्रीय डांसर सोनल मानसिंह और बिहार एवं झारखंड के पूर्व राज्यपाल एम रामा जोइस शामिल हैं।

राजग सरकार ने इसके पहले इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र के प्रबंधन को पुनर्गठित करते हुए वरिष्ठ हिंदी पत्रकार और आरएसएस विचारक राम बहादुर राय को इसका प्रमुख नियुक्त किया था। नए बोर्ड का हाल ही में गठन किया गया और इसकी पहली बैठक 22 अक्टूबर को हुई।
 

 

भाजपा
PHOTO COURTESY: NDTV

संस्कृति मंत्री महेश शर्मा की अध्यक्षता वाले इस 23 सदस्यीय पैनल में पंडित हरि प्रसाद चौरसिया, पंडित राजन मिश्रा और पंडित छन्नू लाल मिश्रा, पंडित शिव कुमार शर्मा भी शामिल हैं. छन्नू लाल मिश्रा लोकसभा चुनाव में वाराणसी सीट पर नरेंद्र मोदी के प्रस्तावक थे. बोर्ड के पुनर्गठन के बारे में पूछे जाने पर संस्कृति मंत्री महेश शर्मा ने कहा कि यह (पुनर्गठन) नियमित प्रक्रिया है।

भाषा की खबर के अनुसार, संप्रग सरकार में बोर्ड के सदस्यों की संख्या 11 थी और अब यह बढ़कर 23 हो गई है. इस बारे में पूछे जाने पर शर्मा ने कहा कि यह संख्या नियमों के अंदर है और अपने संबंधित क्षेत्रों के विशेषज्ञों को बोर्ड में जगह दी गई है. बोर्ड में नियुक्ति तीन साल के लिए होती है और सदस्य नीतिगत स्तर पर संस्कृति मंत्रालय को सलाह भी देते हैं।

Courtesy: Janta ka Reporter