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फरहान अख्तर का MNS को जवाब कहा, ‘रईस’ को रिलीज होने के लिए नहीं देंगे पांच करोड़

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बॉलीवुड फिल्म ‘ए दिल है मुश्किल’ की रिलीज के लिए महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) के चीफ राज ठाकरे द्वारा फिल्म को रिलीज़ करने के लिए हुई 5 करोड़ रुपए की डील के बाद लगातार बॉलिवुड से इस बारे में प्रतिक्रियाएं आई, अब इन प्रतिक्रियाओं में एक और नाम जुड़ गया है फरहान अख्तर का जिन्होंने इस बात पर अपनी नाराज़गी ज़ाहिर की है।

फिल्म अभिनेता फरहान अख्तर ने फिल्म ‘ऐ दिल है मुश्किल’ को विवाद से बचाने 5 करोड़ रुपए देने की मांग को कदम दुर्भाग्यपूर्ण करार दिया है। ऐसा कर फरहान ने MNS को आईना दिखाने का भी काम किया है।

Farhan Akhtar

फरहान अख्तर ने कहा है, कि फिल्म रईस को रिलीज कराने के लिए सेना के राहत कोष में पांच करोड़ रुपये देने का सवाल ही पैदा नहीं होता। इस फिल्म में फरहान अख्तर काम कर रहे हैं। फिल्म में पाकिस्तानी कलाकार के काम करने की वजह से विवाद शुरू हुआ है।

 

उन्होंने यह सवाल भी किया कि आप इंडिया और पाकिस्तान के बीच हर साल होनेवाले करीब 2 अरब डॉलर के बिजनेस को क्यों नहीं रोकते?

फरहान से जब फिल्म ऐ दिल है मुश्किल की तरह सेना के राहत कोष में पैसे देने के बारे में पूछा गया तो उन्होंने कहा कि सेना ने इस तरह से दी जाने वाली राशि को लेने से मना कर दिया है, इसलिए वो ऐसा करने के पक्ष में नहीं हैं।

आपको बता दें कि फरहान से पहले शबाना आजमी इस मामले पर कहा था, ‘कैसी दुखद स्थिति है। मुख्यंमत्री सौदा करते हैं, देशभक्ति खरीदने के लिए मुख्यमंत्री पांच करोड़ रुपये का सौदा करते हैं।’

Courtesy: Janta Ka Reporter

मराठवाड़ा में नहीं थम रहा आत्‍महत्‍या का सिलसिला, उलझन में अधिकारी

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मराठवाड़ा में इस मानसून ने इतनी अधिक बारिश करा दी कि खरीफ व सोयाबीन की फसलों को काफी नुकसान हुआ शायद इस वजह से इस बार भी किसानों ने आत्‍महत्‍या का रास्‍ता चुना

Marathwada farmers
Image: indiatimes.com

औरंगाबाद (जेएनएन)। मराठवाड़ा में जुलाई से अक्टूबर तक की अवधि के दौरान करीब 342 किसानों ने आत्महत्या की घटना ने सरकारी अधिकारियों को उलझन में डाल दिया है क्योंकि इस साल मानसून के दौरान क्षेत्र में काफी अच्छी बारिश हुई है।

इस साल के आरंभ से अक्टूबर के पहले हफ्ते तक करीब 838 मराठवाड़ा किसानों ने अपनी जिंदगी खत्म कर ली जो कि पिछले साल (778) की तुलना में काफी अधिक है। मराठवाड़ा के आठ जिलों में बीड में 93, नांदेड़ और ओस्मानाबाद में 58-58 किसानों ने आत्महत्या की है। सरकारी अधिकारियों ने बताया कि पहले आत्महत्या होने के पीछे खेती में संकट, खराब आर्थिक स्थिति और बैंक के कर्जे को चुकाने में असफलता मुख्य कारण थे। राजस्व विभाग अब इन मामलों की जांच कर रहा है ताकि यह निर्णय लिया जा सके कि इनके परिवार वालों को हर्जाना दिया जाए या नहीं। बीड निवासी डिप्टी कलेक्टर चंद्रकांत सूर्यवंशी ने यह स्वीकार किया कि अच्छे मानसून के बावजूद इस स्थिति को देख सरकार उलझन में है। उन्होंने बताया,’2014 की तुलना में 2015 में किसानों की आत्महत्या का आंकड़ा बढ़ गया है। इसके पीछे जलसंकट ही मुख्य कारण था। हालांकि हम उम्मीद कर रहे थे कि इस साल आत्महत्या की संख्या में कमी आएगी।‘

औरंगाबाद जिले को छोड़ मराठवाड़ा के बाकी सात जिले में काफी अच्छी बारिश हुई है। औरंगाबाद में चार महीने में 89.8फीसद बारिश हुई। लातूर (1,100mm) व नांदेड़ (1,094mm) में काफी अच्छी बारिश होने के बावजूद किसानों की आत्महत्या के आंकड़े में कोई कमी नहीं है। किसानों के लिए सामाजिक कार्यकर्ता जयाजी सूर्यवंशी ने बताया कि मराठवाड़ा के सोयाबीन बेल्ट में काफी अधिक आत्महत्या के मामले देखे गए हैं। उन्होंने बताया कि मराठवाड़ा के वे इलाके जहां बारिश की कमी के कारण स्थिति खराब हो गयी थी वहां इस बार बाढ़ जैसी स्थिति बन गयी थी जो सोयाबीन व खरीफ फसल के लिए हानिकर सिद्ध हुई।‘ शुरुआती विश्लेषण के अनुसार, मराठवाड़ा के 15 लाख हेक्टेयर की खेती बाढ़ के कारण खराब हो गयी।

Source: Dainik Jagran