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वीडियो बनाने वाले जवान यज्ञ प्रताप भूख हड़ताल पर, पत्नी का दावा, कहा अगर कुछ हो गया तो सरकार होगी जिम्मेदार

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लांस नायक यज्ञ प्रताप की पत्नी ने एक न्यूज चैनल से बात करते हुए बताया कि यज्ञ प्रताप भूख हड़ताल पर बैठे हुए है तथा उनका मोबाइल फोन जब्त कर लिया गया है। उन्होंने किसी दूसरे का फोन मांगकर मुझसे बात की और इस बात की जानकारी दी। अगर इस अवस्था में उन्हें कुछ हो गया तो इसकी जिम्मेदार सरकार होगी।

यज्ञ प्रताप

लांस नायक यज्ञ प्रताप की पत्नी ऋचा सिंह का कहना है, ‘’वह फोन पर बात करते हुए रो रहे थे और कह रहे थे कि मेरी अब तुमसे कभी बात नहीं हो पाएगी। मेरा फोन जब्त कर लिया गया है। मैंने खाना-पीना छोड़ दिया है।’’

लगातार एक के बाद एक सेना के जवानों वीडियो सामने आने से उन परेशानियों का पता चल रहा है जिन्हे देश की सेना के बहादुर जवान झेलते है। अपनी पीड़ा का इजहार करते हुए ये सभी जवान पीएम मोदी से गुहार लगाते नज़र आ रहे है कि इनकी समस्याओं पर भी देश की सरकार ध्यान दे।

 

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक देहरादून में तैनात सेना के जवान यज्ञ प्रताप सिंह के अनुसार उन्होंने पिछले वर्ष 15 जून को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र लिखते हुए ध्यान दिलाया था कि अधिकारियों द्वारा जवानों का किस प्रकार से शोषण किया जाता है।
इस पत्र के लिखे जाने की बात बाद में जब सेना के अधिकारियों को पता चली तो जवान यज्ञ प्रताप सिंह को काफी डांटा-फटकारा गया। इसके बाद जवान यज्ञ प्रताप सिंह को लग रहा है कि अब उनका इस मामले पर कोर्ट मार्शल भी हो सकता है। यज्ञ प्रताप के अनुसार सेना में कई जगहों पर एक सैनिक से कपड़े धुलवानाए बूट पॉलिश करवानाए कुत्ते घुमवाना जैसे काम करवाना गलत है।  यज्ञ प्रताप ने सीधे प्रधानमंत्री से अनुनोध करते हुए कहा है कि वे इस मामले में दखल दें क्योंकि उसने पत्र लिखकर कोई गलत काम नहीं किया है।

जबकि सैन्य बलों के जवानों की और से लगातार सोशल मीडिया पर शिकायत वाले वीडियो आने से सरकार हरकत में आ गई है। अब इस पर पाबंदी की तैयारियां कर ली गई है।

सोशल मीडिया पर जवानो के वीडियो आने के बाद काफी हंगाम हुआ और उसके बाद गृह मंत्रालय ने एक्शन लेते हुए नई गाइडलाइन जारी करके अर्धसैनिक बलों के लिए सोशल मीडिया को प्रतिबंध करने की खबर आई है। मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, नए निर्देश के मुताबकि पैरामिलिटरी का कोई भी जवान बिना अधिकारिक निर्देश के कोई भी फोटो या वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर नहीं कर सकता।

Courtesy: Janta ka Reporter
 

नोटबंदी के बाद शर्मिंदगी महसूस कर रहे आरबीआई कर्मचारी

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नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद देश में बने हालात से भारतीय रिजर्व बैंक के कर्मचारी अपमानित महसूस कर रहे हैं। इस सदर्भ में कर्मचारियों ने आरबीआई गवर्नर उर्जित पटेल को चिट्ठी लिखकर अपना विरोध दर्ज कराया हैं। आरबीआई कर्मचारियों की इस चिट्ठी में नोटबंदी की प्रक्रिया के परिचालन में कुप्रबंधन और सरकार की तरफ से करंसी को-ऑर्डिनेशन के लिए एक अफसर को अप्वाइंट करने का विरोध किया गया है।

RBI
 
आरबीआई कर्मचारियों की इस चिट्ठी में कहा गया है कि नोटबंदी की प्रक्रिया में हुए कुप्रबंधन से आरबीआई की छवि और स्वायत्तता को इतना नुकसान पहुंचा है कि इसे दुरूस्त करना काफी मुश्किल है। इसके अलावा कर्मचारियों ने मुद्रा प्रबंधन के लिए वित्त मंत्रालय के एक वरिष्ठ अधिकारी की नियुक्ति को आरबीआई में अतिक्रमण बताया है। यूनाइटेड फोरम ऑफ रिजर्व बैंक ऑफिसर्स एंड इम्पलाइज की इस चिट्ठी में कहा गया कि, रिजर्व बैंक की दक्षता और स्वतंत्रता वाली छवि उसके कर्मचारियों के दशकों की मेहनत से बनी थी, लेकिन इसे एक झटके में ही खत्म कर दिया गया।
 
आरबीआई गवर्नर को लिखी गई इस चिट्ठी में ऑल इंडिया रिजर्व बैंक इम्पलाइज एसोसिएशन के समीर घोष, ऑल इंडिया रिजर्व बैंक वर्कर्स फेडरेशन के सूर्यकांत महादिक, ऑल इंडिया रिजर्व बैंक ऑफिसर्स एसोसिएशन के सीएम पॉलसिल और आरबीआई ऑफिसर्स एसोसिएशन के आरएन वत्स के हस्ताक्षर हैं। वहीं ऑल इंडिया रिजर्व बैंक इम्प्लाइज एसोसिएशन के समीर घोष ने चिट्ठी लिखने की पुष्टि करते हुए कहा है कि हमने उर्जित पटेल से अपील की है कि वह आरबीआई की स्वायत्तता को सुरक्षित रखें और आरबीआई में वित्त मंत्रालय के दखल को खत्म करने के लिए जरूरी कदम उठाए।

Courtesy: National Dastak
 

नोटबंदी की मार झेल रहे किसानों ने बीजेपी से बनाई दूरी, किसान सम्मेलन में खाली पड़ी रहीं कुर्सियां

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लखनऊ, यूपी चुनाव भाजपा के लिए टेढ़ी खीर बनती जा रही है एकतरफ भाजपा अपनी पूरी ताकत झोंक रही है यूपी चुनाव को जीतने के लिए तो दूसरी तरफ प्रदेश की जनता का साथ भाजपा को नहीं मिल पा रहा है। ऐसे में कयास लगाए जा रहे हैं कि भाजपा का यूपी की सत्ता से वनवास अभी खत्म नहीं हो पायेगा।

Kisan Sammelan

2014 के लोकसभा चुनाव में यूपी ने 73 सांसद दिए भाजपा को इसके बावजूद 2 साल तक भाजपा का कोई भी सांसद प्रदेश में अपना चेहरा तक दिखाने नहीं आया। किसानों की फसलें नष्ट हो गयी सूखे से और बेमौसम बारिश से जिसका केंद्र सरकार से उन्हें कोई अपेक्षित लाभ नहीं मिल पाया। अब जब यूपी में विधानसभा चुनाव होने वाले हैं तो भाजपा को यूपी के किसानों की याद आई है।

यूपी में चुनावी नैय्या पार लगाने के लिए भाजपा पिछले 6 महीने से तमाम बैठकें और कार्यक्रमों के जरिये प्रदेश में अपने जनाधार को बढाने की कोशिश कर रही है पर भाजपा के उम्मीदों को बल मिलता नहीं दिख रहा है जहाँ उसके द्वारा निकाली गयी तमाम परिवर्तन यात्रएं फ्लॉप हो गई तो भाजपा नेता पिछड़ा वर्ग सम्मलेन मैं भी जनता का आकर्षण नहीं खींच पाई।

अब भाजपा यूपी के सबसे बड़े वोटबैंक समझे जाने वाले किसान वर्ग को रिझाने के लिए माटी तिलक कार्यक्रम का आयोजन कर रही है। जहाँ किसानों द्वारा सम्मलेन में नहीं पहुँचने से भाजपा नेतृत्व में बेचैनी बढ़ने लगी है।

दरअसल भाजपा ने यूपी चुनाव को देखते हुए किसानों को अपने पाले में करने के लिए माटी तिलक कार्यक्रम का आयोजन किया है। भाजपा को लग रहा है कि बाह्मण और क्षत्रियो समेत अगर भाजपा का मूल वोट बैंक न खिसका तब भी भाजपा को कुछ वोट की खास जरूरत होगी जिसमें किसानों की अहम भूमिका होगी। ऐसे में पूर्वांचल के वोटरों को साधने के लिए भाजपा ने भदोही से सांसद वीरेंद्र सिंह मस्त को भाजपा किसान मोर्चा का राष्ट्रीय अध्यक्ष बना दिया है। ताकि किसानों के सहारे यूपी की बैतरिणी को पार किया जा सके।

भाजपा ने किसानों को अपने साथ जोड़ने के लिए कहा है कि भाजपा के घोषणा पत्र में किसानों के मुद्दे सबसे पहले होगें औऱ किसानों की समस्या को निपटाने के लिए भाजपा किसी भी तरह से पीछे नहीं हटेगी उसके बाद भी भाजपा के इस कार्यक्रम से किसानों की नामौजूदगी ये बता रही कि भाजपा को अपने प्लान में जमीनी हकीकतों को जानने की कोशिश करनी चाहिये।

जानकारों की माने तो सोनभद्र में भाजपा के इस कार्यक्रम में इतनी कम भीड़ भाजपा के लिए अच्छे संकेत नहीं दे रहे हैं। इस मसले पर लोगों से पूछने पर लोगों ने इसे नोटबंदी के बाद भाजपा से किसानों की नाराजगी बताया।

लोगों की मानें तो नोटबंदी ने किसानों की कमर तोड़ दी है। किसानों ने अपने फसलों की समय से बुआई नहीं की। जो पैदावार हुई उसका लाभ भी किसानों को नहीं मिल पा रहा है। सब्जियों का भाव लगातार गिरता जा रहा । जिससे किसानों की लागत तक नहीं निकल पा रही है। ऐसे में भाजपा से किसान नाखुश दिख रहा है जिसका नतीजा उसे यूपी चुनाव में देखने को मिल सकता है।

Courtesy: Dainik Aaj

Hear the Real Story: Survivor of Bengaluru Mass Molestation Speaks Out

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The night of December 31, 2016 in Bengaluru will be remembered as it should be.

Bengaluru, known for its cosmopolitan culture is also the IT hub of India. As the gory stories of the molestations and gendered violence crept in, the initial estimates put the mob number at 15,000 – 25,000. There were 1500 policemen on duty. Revellers poured into the streets of MG Road and Brigade Road, and there were reports that they attacked women in groups, molested and groped women in the wee hours. Accounts of women being groped, grabbing their modesty and many left unreported. As large sections of the police just stood by, some say there were “outnumbered”. A select few police officials have jumped into action very quickly, without whom this would have continued for long.

Within days, as atrocious comments from sections of the political class came in almost justifying the violence, accounts of Survivors are clear and trong. It is just a question of whose voice who wants to hear.
Geeta (name changed for privacy reasons) narrates her story,

“I was with my friend that night. We finished the party at MG Road and was heading back home. We met a few friends enroute. Hundreds of people flooded the streets. I thought it was some collective drive against new year celebrations. But NO! That anonymous mob was on a drive to squeeze every girl they came across. At a point, I couldn’t even trust my friend. He tried to help me, but in vain. I could have handled 2-3 guys, hitting, beating or shouting. I could have used pepper spray. But when 20,30 guys attack you with sole intention of grabbing your private parts, how can you stop it. Even I couldn’t resist them for long. I was groped and molested. My private parts were grabbed. I was a helpless fish out of water”,

This survivor nearly broke down telling the tale.

Neither was I drunk nor was I wearing a short skirt. It was cool and i was completely covered. Neither the men were drunk nor was I inviting them with my behaviour. It just happened in a jiffy. They came, attacked, groped, touched me everywhere and targeted the next girl”.

There is another chilling incident in Kammanahalli, East Bengaluru that has been recorded in CCTV. The footage is widely available on internet. It shows a calculated witch hunting by two boys:a  lady turns into an abandoned lane, walking all alone. 2 boys enter the same lane. Initially it looked as if they had no intention of harming her. later they take a U-Turn and stop the bike opposite to her. Then the driver gets down and pulls the lady, holds her tights, grabs her, touches her everywhere. He pulls and takes her to his friend who was the rear seat. He also molests her brutally. That brave girl struggles throughout that 45-seconds, but in vain. She falls on the ground and still those boys devilish act continues. After a few seconds, they leave. Fortunately, the footage was widely circulated on social media and netizens helped police crack the whip. Within 48-hours of this incident the police arrested those two. It was later revealed that they had been stalking that lady for quite some time.

Why has there been no national outrage? Is the nation under a new dispensation living in paralysis or fear?