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बैंक से लोन लेकर शादियों में पैसे लुटाते हैं किसान- भाजपा नेता

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नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद से ही लोगों को होने वाली दिक्कत किसी से भी छुपी नहीं है। नोटबंदी ने आम जनता के साथ-साथ किसानों और कारोबारियों की भी रोजीरोटी रोक सी दि थी। नोटबंदी के बाद से ही ना जाने कितने लोगों की जान चली गई। लेकिन नोटबंदी के फैसले को बीजेपी सरकार सही बता रही है साथ ही बीजेपी के मंत्रियों ने नोटबंदी के बाद से होने वाले नुकसान और मौतों पर अपने अजीबोंगरीब बयान दिए। 


 
हाल ही में बीजेपी सांसद और किसान मोर्चा के अध्यक्ष वीरेंद्र सिंह ने हाल ही में किसानों को लेकर कहा की नोटबंदी से किसानों को परेशानी होने की कोई खबर नहीं आई है। लेकिन इससे शादियों में होने वाले फालतू खर्चे और शराब के इस्तेमाल में खासी कमी आई है। 
 
आपको बता दें कि वीरेंद्र सिंह ने यह बात पिछले हफ्ते बीजेपी के एक कार्यक्रम में भी कहीं थी। सिंह यूपी के बाधोई से तीन बार सांसद रह चुके हैं। उन्होंने आगे कहा कि नोटबंदी का सबसे बड़ा फायदा यही हुआ कि लोगों में बचत करने का गुण आ गया। उन्होंने यह भी कहा कि लोन पर पैसे लेने से फिलजूलखर्ची की आदत हो जाती है। शास्त्रों का जिक्र करते हुए वीरेंद्र सिंह ने कहा, ‘शास्त्रों में आधुनिकीकरण में सब कुछ प्रयोग में लाने को कहा गया है। आप लोगों को कंजूस होने के लिए कोई नहीं कह रहा लेकिन पैसे का फिजूल खर्ची भी ठीक नहीं है।’

वीरेंद्र सिंह ने आगे कहा, ‘किसान लोन लेकर भव्य शादियों का आयोजन करते हैं। दावत में आखिर खर्च आता ही कितना है? ज्यादातर पैसा दिखावे, पटाखों और शराब में खर्च होता है। अब इसपर कंट्रोल हुआ है। पहले लोग थोड़ी सी दूर जाने के लिए भी बाइक का सहारा लेते थे। लेकिन नोटबंदी के बाद यह सब बदल गया है। अब लोग पैदल चलने की आदत डालने लगे हैं।’
 
वहीं वीरेंद्र सिंह ने इससे पहले दिल्ली में हुए राष्ट्रीय कार्यक्रम के दौरान भी यही बातें की थी। विरेंद्र सिंह ने कहा था कि नोटबंदी की वजह से बीजेपी ने उन लोगों को नुकसान हुआ है जो अपनी बड़ी-बड़ी गाड़ियों पर बीजेपी का झंडा लगाकर घूमते हैं। वीरेंद्र सिंह ने आगे कहा था कि ऐसे लोगों ने सरकारी खजाने को लूटा है।

Courtesy: National Dastak
 

IIMC प्रशासन की तानाशाही, फेसबुक पर लिखने की वजह से छात्र सस्पेंड किया

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नई दिल्ली। भारत के सर्वोच्च संस्थान भारतीय जनसंचार संस्थान (IIMC)में तानाशाही का दौर जारी है। संस्थान में ताज़ा मामला रोहिन वर्मा का है। रोहिन आईआईएमसी में हिंदी पत्रकारिता के स्टूडेंट हैं। उन्हें संस्थान से सस्पेंड कर दिया गया है। दरअसल यह सजा उन्हें आवाज उठाने की मिली है। आवाजें भी उनके पक्ष में उठाईं जिन्हें सरकार दबाना चाहती है। 

Rohin

आईआईएमसी में बैठे भगवा समर्थकों को उनकी लिखी बातें रास नहीं आईं। 9 जनवरी को रोहिन को संस्थान से बाहर कर देने का फरमान जारी कर दिया गया। जिससे अब स्पष्ट हो गया है कि आईआईएमसी में भगवाकरण की आहट साफ़ दिखाई दे रही है।
 
दरअसल रोहिन वर्मा को ऑनलाइन कंटेंट की वजह से निकाला गया है। यह कंटेंट चेक करने पर आप पाएंगे कि रोहन आम दिनचर्या से लेकर अपने आसपास हो रहे घटनाक्रमों के बारे में लिखते रहे हैं, जोकि आईआईएमसी में सिखाया भी जाता है। साथ ही उनके लेख 'द हूट; और 'न्यूज़ लॉन्ड्ररी' में छपते थे। अपने इन लेखो में रोहिन संविधान में दिए गए अधिकारों की बात करते। 
 
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आईआईएमसी में ये पहली बार नहीं है जब अधिकारों की मांग को लेकर किसी को हटाया गया हो। इससे पहले संस्थान में काम कर रहे 25 मजदूरों को बाहर किया था। उन मजदूरों का समर्थन जब संस्थान के शिक्षक नरेंद्र सिंह यादव ने किया तो उन्हें भी नौकरी से बाहर कर दिया गया। 
 
हाल ही में देश के सबसे पड़े पत्रकारिता संस्थान ने वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल की किताब 'मीडिया को अंडरवर्ल्ड' को भी पाठ्यक्रम से हटा दिया गया था। ये किताब वहां आईआईएमसी सहित कई संस्थानों की रीडिंग्स में शामिल है। हाल में घटित इस सभी घटनाओं से मुँह नहीं मोड़ा जा सकता है। ये घटनाएं इस बात की तस्दीक करती हैं कि भारतीय जनसंचार संस्थान में भगवाकरण बड़े पैमाने पर अपने पांव पसार रहा है।
 
इस मामले पर वरिष्ठ पत्रकार दिलीप मंडल ने लिखा है….
 
प्रचारक ने कहा- लडका ख़तरनाक है। इसे इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मास कम्यूनिकेशन यानी IIMC से हटाओ। इसे लाइब्रेरी में तो क़तई न घुसने दो।
क्यों?

क्यों क्या? वह लिखता है। पत्रकार है और लिखता है। The Hoot और News Laundry में छपता है। जहाँ IIMC के सबसे बड़े अफ़सर और कई प्रोफ़ेसर तक अपना लिखा नहीं छपवा सके।
नाम रोहिन वर्मा है।

मैंने लड़के की टाइम लाइन देखी। ऐसा क्या लिख दिया बंदे ने। ख़ास कुछ नहीं है। यही कुछ संस्थान की बातें। सब संविधान के मौलिक अधिकार के दायरे में। अपनी माँ के साथ सेल्फी। कुछ खान पान की तस्वीरें। कुछ JNU वाले नजीब की अम्मा।

एक ही ख़तरनाक चीज़ नज़र आई।

सावित्रीबाई फुले। वह पत्र जो सावित्रीबाई ने ज्योतिबा फुले को लिखे थे।

Courtesy: National Dastak
 

A decade after Mecca Masjid police firing, Telangana yet to make commission report public

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The report was submitted to the state in 2010, but is yet to be made public.

Mecca masjid

More than a decade after the Mecca Masjid bomb blast, and the police firing that followed, killing five people, the state is reportedly yet to make the findings of the Justice Bhaskara Rao Commission public.

Writing for the Times of India, Syed Mohammed reports that the state had declined an RTI activist a copy of the report for academic purpose in November last year. 

The report adds that, when the case came up for hearing on Tuesday before chief information commissioner (CIC) M Ratan, RTI activist SQ Masood was present, but there was no official from the general administration department. 

The commission had sent both the parties a notice on January 2 to detail what action had been taken on the RTI query. 

"Apart from asking for the terms of reference (ToR) of the panel, I also asked for a copy. And if this is not possible, I requested for time so that I could read the report, which is permissible under provisions of the RTI Act," Masood told TOI. 

In the reply to the query, the state had said that the report had been placed in the state legislature, and sharing the information could cause a "breach of privilege."

On May 18, 2007, members belonging to the Hindu militant outfit Abhinav Bharat had allegedly placed two bombs in the Mecca Masjid, considered one of holiest Muslim sites in the city, during Friday prayers when thousands of people had gathered.

As news of the blast spread, tension escalated in Old City, especially the areas around Charminar, with many people taking to the streets, and turning into vandalising mobs, who clashed with the police.

The police resorted to lathi-charges, teargas shells, and firing in the air. 

The police claimed that the mob was getting out of control, and it had to fire at the people to disperse the crowd. Five people were killed, and four were injured in the firing at two places.

However, many people including the AIMIM and Hyderabad MP Asaduddin Owaisi alleged that the police used excessive force.

In June 2010, the state government constituted the Justice Bhaskar Rao commission, which submitted its findings in October the same year.

There have been continuous demands since then on successive state governments, to release the findings of the report.

Courtesy: The News Minute

500 करोड़ के हवाला में आया भाजपाई मंत्री का नाम, शिवराज सिंह ने खुलासा करने वाले SP को हटाया!

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भोपाल। भाजपा शासित राज्य मध्यप्रदेश के मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान इन दिनों एक नए आरोप में फंसते नजर आ रहे हैं। दरअसल 500 करोड़ का हवाला करोबार पकडऩे वाले कटनी एसपी गौरव तिवारी के ट्रांसफर को लेकर कटनी जिले के लोग शिवराज सिंह सरकार से नाराज हो गए हैं। इस हवाला कारोबार में मध्य प्रदेश सरकार के एक मंत्री का नाम सामने आया है और दो दिन के अंदर ही खुलासा करने वाले एसपी गौरव तिवारी को हटा दिया गया।

Shivraj Singh

जिसके बाद एसपी गौरव तिवारी के सपोर्ट में मंगलवार को पूरा शहर सड़कों पर उतर आया। लोग तिवारी का ट्रांसफर रद्द करने की मांग कर रहे थे। तिवारी का ट्रांसफर कटनी से छिंदवाड़ा कर दिया गया है। वे एक्सिस बैंक समेत कई बैंकों में फर्जी खातों से 500 करोड़ के हवाला लेनदेन की जांच कर रहे थे। तिवारी कटनी में 6 महीने ही पोस्टेड रहे। 
 
तिवारी के समर्थन में यहां के सुभाष चौक पर हजारों की तादाद में लोग इकट्ठा हुए। पूरा बाजार भी बंद रहा। लोगों ने तिवारी का ट्रांसफर रद्द करने की मांग की। कटनी में किसी पार्टी या संगठन ने नहीं बल्कि आम जनता ने ही बंद बुलाया था। इसमें व्यापारी वर्ग से लेकर सभी लोग शामिल थे।

कटनी में आईपीएस गौरव तिवारी ने जिस 500 करोड़ रुपए के हवाला कांड का पर्दाफाश किया था, उस मामले के आरोपियों के मध्यप्रदेश सरकार में भाजपा मंत्री संजय पाठक के रिश्ते सामने आ रहे हैं। संजय कटनी जिले के विजयराघवगढ़ से विधायक हैं। आपको ये जानकर हैरानी होगी कि पाठक मध्यप्रदेश सरकार के सबसे अमीर मंत्री हैं। उनके पास न केवल 141 करोड़ की संपत्ति है, बल्कि खुद का हेलीकॉप्टर भी है।
 
आपको बता दें कि तिवारी एक्सिस बैंक समेत कई बैंकों में फर्जी खातों से 500 करोड़ रुपए के हवाला लेन-देन की जांच कर रहे थे। तिवारी ने इस हवाला कारोबार की जांच के लिए एक एसआईटी का गठन किया था। 4 जनवरी को एसआईटी की जांच में घोटाले के सबसे बड़े सूत्रधार सरावगी बंधुओं के नाम सामने आए थे। इनके चार नौकरों के नाम से कई बोगस कंपनियां बनाई गईं थीं। 

इन बोगस कंपनियों के खातों से करीब 100 करोड़ रुपए के संदिग्ध लेन-देन की बातें सामने आ चुकी हैं। 6 जनवरी तक सरावगी के दो नौकर संदीप बर्मन और संजय तिवारी को गिरफ्तार किया गया है। उन्होंने पूछताछ में सरावगी के राज्य सरकार में मंत्री संजय पाठक के रिश्तेदारों से नजदीकियों की बात बताई थी।
 
मामले के बाद सरावगी बंधु फरार बताए जा रहे हैं। उनके यहां से एक मिनी ट्रक भरकर डॉक्युमेंट्स बरामद किए गए हैं। इससे पहले भी तिवारी ने बालाघाट एसपी रहते हुए लकड़ी माफिया के खिलाफ जंग छेड़ी थी, जिसमें वहां के तब कलेक्टर रहे वी किरण गोपाल पर भी आरोप लगे थे। इसके बाद किरण गोपाल को सरकार ने बालाघाट कलेक्टर पद से हटा दिया था। कुछ समय बाद ही तेजतर्रार अफसर गौरव तिवारी का ट्रांसफर कर कटनी एसपी बनाया गया था।

इस बीच सागर में आयोजित BJP की कार्यसमिति की बैठक में शामिल होने पहुंचे उच्च शिक्षा राज्य मंत्री संजय पाठक ने मीडिया से चर्चा करते हुए 'हवाला कांड' के आरोपों को निराधार बताया। साथ ही उन्होंने कहा कि गौरव तिवारी एक ईमानदार पुलिस अफसर हैं। उनको छिंदवाड़ा की कमान सौंपी गई है।

Courtesy: National Dastak
 

Controversial Kerala spiritual guru, Swami Bhadrananda arrested for derogatory FB posts

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Swami had been arrested earlier in 2008 for opening fire at Aluva police station.

Swami Bhadrananda

Controversial spiritual guru, Swami Himaval Maheswara Bhadrananda was arrested on Tuesday by Ernakulam North police for his Facebook posts that allegedly hurt religious sentiments.

Ernakulam North Circle Inspector T B Vijayan told The News Minute that Swami withdrew the Facebook posts which were derogatory against Muslims.

“Police charged a suo moto case against him. After his posts got controversial, he removed them and posted against few Hindu organisations also,” the Inspector said.

Swami who has been active on Facebook, had been arrested earlier in 2008 for opening fire at Aluva police station.

In 2008, Bhadrananda phoned a media reporter and threatened to kill himself saying that the media had tarnished his image by comparing him to Santhosh Madhavan, a self-declared godman who was arrested earlier. Bhadrananda also said the reason for his suicide threat was that he was asked to leave the house by his landlord. Swami also had a pistol with him.

Police arrived later and took him to Aluva circle office where his pistol went off two times, injuring himself and one reporter of Madhyamam daily. In the case that was filed, 33 people including media persons had given statements in the court.

Prior to this incident, he was booked by police for trespassing into a media house and threatening them for publishing news against him. He had also been charged for using a red beacon illegally in his car.

Courtesy: The News Minute