Home Blog Page 2273

हरियाणा: खट्टर की पुलिस ने किया पीएम मोदी के बेटी बचाओ अभियान का अपमान, मंत्री के दोस्त को बचाने में जुटी

0

नई दिल्ली। हरियाणा पुलिस पर केंद्र सरकार की महिला कर्मचारी ने गंभीर आरोप लगाए हैं। महिला कर्मचारी गीता यादव ऊर्फ गीता यथार्थ की माने तो पुलिस ने घरेलू हिंसा का केस दर्ज करने के बदले पूरे मामले को ही रफा दफा कर दिया है। दरअसल गीता यादव केंद्रीय कर्मचारी हैं और उन्होंने अपने पति पर घरेलू हिंसा का आरोप लगाया है। साथ ही पति से हर्जाना मांगा है। 


 
लेकिन हरियाणा पुलिस ने केस दर्ज करने के बदले उनके रसूखदार पति देवेंदर सिंह, जो हरियाणा स्टाफ सेलेक्शन बोर्ड के मेंबर हैं उनको लगभग क्लीनचिट दे दी है। दरअसल गीता यादव ने अपने पति पर दहेज, घरेलू हिंसा, जान मारने की धमकी का आरोप लगाया था। तीन महीने से ज्यादा समय हो गया है लेकिन अब तक केस दर्ज नहीं हुआ है। सीएम विंडो पर शिकायत करने के बाद पुलिस लगातार गीता यादव को ही परेशान कर रही है। 
 
गीता यादव महिला अत्याचार के खिलाफ सोशल साइट्स पर लगातार लिखती रही हैं। वह केंद्र सरकार में कर्मचारी हैं। लेकिन जिस तरह अपने रसूख और जान पहचान की वजह से उनका आरोपी पति केस तक दर्ज नहीं होने दे रहा है इससे साफ है कि हरियाणा पुलिस दबाव में है। 
 
गीता यादव की माने तो उनके पति का जवाहर यादव और सूबे के मंत्री रामविलास शर्मा से काफी नजदीकी है। शायद इसी वजह से उन्हें हरियाणा स्टाफ सेलेक्शन बोर्ड का मेंबर बनाया गया। साथ ही केस दर्ज नहीं हो रहा है। 
 
सोशल साइट्स पर गीता यादव ने रामविलास शर्मा के साथ अपने पति की तस्वीरें और अपने शरीर पर जख्म के निशान वाली तस्वीरें भी शेयर की है। इससे साफ है कि हरियाणा में महिलाओं को न्याय मिल पाना कितना मुश्किल है। जबकि पीएम ने हरियाणा से बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ का नारा दिया था। 
 
लेकिन जिस तरह एक पत्रकार रही और अब केंद्रीय कर्मचारी गीता यादव का केस तक दर्ज नहीं हो पा रहा है उससे साफ है कि हरियाणा पुलिस पीएम के अभियान को ही पलीता लगा रही है। साथ ही रसूखदार आरोपियों के लिए हरियाणा खट्टर सरकार में स्वर्ग से कम नहीं है। गीता यादव की पूरी कहानी आप उनके फेसबुक पेज पर जाकर भी पढ़ सकते हैं।

फेसबुक पर गीता यादव का दर्द यहां क्लिक कर पढ़ें
 
गीता यादव लिखती हैं- 
#mlkhattar 
#cmohry 
#ministryWCD
CM Window से कॉल आता है, फीडबैक के लिए. 
तीन महीने से ऊपर हो गया कंप्लेंट किये, 
बीच-बीच पुलिस ने मुझे खूब हरास् भी किया.
फेसबुक पोस्ट को लेकर गलत तरीके से FIR भी करदी मुझ पर.
अभी तक कोई कार्यवाई नहीं हुई.
फीडबैक क्या दू.??
फीडबैक वालें ने ही बताया आपकी रिपोर्ट तो पुलिस वालों ने भेज दी है. 
मैं- पर मुझे कोई जानकारी नहीं है. 
फीडबैक यूनिट वाले ने बताया–
" आप दोनों पति पत्नी के रहन- सहन में फर्क था, आप अपने पति को गालियां दी. फ़ोन रिकॉर्डिंग्स है." 
इसलिए कोई केस नहीं बनता. ये रिपोर्ट दी है.
मैंने रिप्लाई किया- 
1. क्या पुलिस ने उस होटल की जांच करवाई जहा पतिदेव ने अपने दोस्त के साथ कमरे में बंद किया था. 
Huda Field Hostel, sector-6, Panchkula.
2. मेरा सारा सामान और जेवेलरी जो पेरेंट्स ने मेरे यूज़ के लिए दी थी, जब मुझे घर में घुसने नहीं दिया जाता तो उसकी रिकवरी.
3. बच्चे को न अपनाने का मेन्टल टॉर्चर.
4. पति की चोट से मेरे शरीर पर बने नील के निशान.
5. 8 महीने के अफेयर के बाद शादी होती है, रहन- सहन का फर्क होता तो शादी ही न होती.
और बहुत सारी बातें है….!!!
एक मंत्री और उसके अफसर की शै पर अगर पुलिस ऐसी रिपोर्ट बनाती है तो पुलिस को सिर्फ वर्दी वाले गुंडे ही कहूँगी, जो मेरी जैसी महिलाओ के शोषण में गुंडे पतियों का साथ देती है. 
ये गुडगाँव की मॉडर्न पुलिस है.
(राईट साइड) शिक्षा मंत्री रामबिलास शर्मा के साथ माला पहनते हुए, ब्लैक ड्रेस में मेरे पतिदेव.
चुनावो में मंत्री साहब के इलेक्शन एजेंट थे, जिसकी वजह से ही पतिदेव को HSSC का मेंबर बनाया गया. और बहुत सालों से मंत्री साहब के फाइनेंसर भी है.

#PoliceReforms

Courtesy: National Dastak
 

गुजरात: दलित आंदोलन का दम, भाजपा सरकार को देनी पड़ी दलितों को जमीन

0

अहमदाबाद। पिछले लगभग तीन दशकों से अपनी जमीन के लिए गुजरात का दलित समुदाय लड़ाई लड़ रहा था। राज्य की सरकार के कान में जूं तक नहीं रेंग रही थी। लेकिन एक दिन पहले ही यानि 5 जनवरी 2017 गुरुवार को गुजरात सरकार ने अहमदाबाद जिले के धोलका तहसील के सरोदा गांव और धंधुका तहसील के 115 दलितों को लगभग 250 बीघा की जमीन पर कब्जा दे दिया। इसके बाद बाकि लोगों को भी जमीनों पर कब्जा दिया जाएगा।

Gujarat Dalits
 
यह यूं ही नहीं हुआ इसके लिए दलित समुदाय तीन दशकों से लड़ाई लड़ रहा था लेकिन असर दिखाया है वर्तमान समय में हो रहे दलित आंदोलन ने। गुजरात के उना कांड के बाद जिस तरह से पूरे देश भर में दलित समुदाय एकत्र हुए हैं और अपने हक की लड़ाई के लिए आंदोलन कर रहे हैं उसने सरकार की जड़ें हिला कर रख दी हैं। आग में घी का काम किया है युवा दलित नेता जिग्नेश मेवाणी ने। जिग्नेश मेवाणी ने दलित समुदाय में दंभ भरने का काम किया है।
 
आपको बता दें कि गुजरात सरकार ने कुछ साल पहले लैंड सीलिंग एक्ट के तहत ली गई जमीन को भूमिहीन दलितों में बांटने की योजना बनाई थी। अहमदाबाद की धंधुका तहसील में साल 1984 में 21 सौ एकड़ जमीन का कागजों में आवंटन भी किया गया, लेकिन लाभार्थियों को जमीन नहीं मिली। गुरुवार को धंधुका तहसील के सैकड़ों दलित जमीन दिलाने की मांग को लेकर अहमदाबाद में प्रदर्शन किया और जिलाधिकारी से भी मिले थे।
 
दलित नेता जिग्नेश मेवाणी ने प्रदर्शनकारियों को संबोधित करते हुए कहा था कि वाईब्रेंट गुजरात सम्मेलन में सरकार के साथ करार करने वाले औद्योगिक घरानों को ताबड़तोड़ जमीन दी जाती है, लेकिन दलितों को कानून होने के बावजूद जमीन का हक़ नहीं मिल रहा।
 
मेवाणी ने कहा था कि जहां-जहां जमीन का आवंटन दलितों को सिर्फ कागजों पर हुआ है वहां, 7 दिनों के भीतर दलितों को जमीन भी दी जानी चाहिए। उन्होंने चेतावनी दी थी कि अगर उनकी मांग नहीं मानी गई तो राज्यभर के दलित इकट्ठा होकर 10-11 जनवरी को होने जा रहे वाईब्रेंट गुजरात सम्मेलन का विरोध करेंगे।
 
इसके बाद राजस्व अधिकारियों ने जमीनों पर कब्जा देने का काम शुरू कर दिया। इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत में अहमदाबाद की कलेक्टर अवंतिका सिंह औलाख ने बताया कि पिछले कई दिनों से दलितों को जमीनों पर कब्जा देने की कार्रवाई चल रही थी। उस संबंध में हमने एक समिति का भी गठन किया है, और हमने भूमि पार्सल की माप और प्रक्रिया पूरी करने के बाद दलितों को जमीन देने का काम शुरू कर दिया है।
 
कलेक्टर के मुताबिक, पूरी प्रक्रिया थोड़ी कठिन थी लेकिन जमीन पर कब्जा देने के लिए हमने सबसे बात कर ली थी। सरोदा गांव के रमन महेरिया ने बताया कि हमारे 115 परिवारों को जमीन पर भौतिक कब्जा दिया गया है। हालांकि सिर्फ 80 परिवारों को ही खेती लायक जमीन मिली है बाकि 35 परिवारों को बंजर जमीन मिली है हम इस संबंध में कलेक्टर से बात करेंगे।
 
धंधुका तहसील के प्रांत अधिकारी आर वी वाला ने बताया कि हमने कल रायका गांव का सर्वे करके लोगों को जमीन पर कब्जा दिया है और आगे हमने फेडरा गांव में भी माप का काम शुरू कर दिया है माप का काम होने के बाद हम और लोगों को जमीन पर कब्जा देंगे।

Courtesy: National Dastak