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फराह खान के पति से ट्विटर यूज़र ने पूछा, आपके बच्चे हिन्दू हैं या मुसलमान, शिरीष कुंदर ने दिया मुंह तोड़ जवाब

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बॉलीवुड निर्माता-निर्देशक और फराह खान के पति शिरीष कुंदर से एक ट्विटर यूर्जर ने उनके बच्चों के धर्म पर सवाल पूछा तो शिरीष ने ऐसा जवाब दिया कि सबकी बोलती बंद हो गई और सोशल मीडिया पर हुई खूब वाहवाही।

फराह खान

दरअसल, शिरीष नेफराह खान के साथ बच्चो का फोटो ट्विटर पर अपलोड किया और केप्शन में शीरीष ने लिखा “ग्रैंड कैन्यन पर फख्र से पोज़ करता हुआ मेरा परिवार, मुझे वक्त का कोई अंदाज़ा नहीं है। पता नहीं, 2017 शुरू हुआ या नहीं”

 

Kunder tweet

इस फोटो के पोस्ट होते ही एक फातिमा आर्या ट्विटर यूजर ने शीरीष से सवाल कर डाला आपके बच्चे हिन्दू हैं या मुसलमान? इस बात पर एकदम मुहतोंड जवाब देते हुए शीरीष ने ट्वीट किया  “ये इस बात पर निर्भर करता है कि कौन सा त्योहार आने वाला है। पिछले महीने वो ईसाई थे।”

 

शीरीष ट्विटर पर अपनी बेबाक राय रखने के लिए जाने जाते है और कई बार कंट्रोवर्सी में भी रहें हैं।

Kunder tweet

एक इंटरव्यू में शीरीष ने बताया था कि कैसे निर्भया गैंगरेप के बाद उन्होंने ट्वीट करना शुरु किया था फिर धीरे-धीरे ये उनकी आदत में शुमार हो गया था।

उन्होने कहा था, ” मैं तभी ट्वीट करता हूं, जब मुझे गुस्‍सा आता है। मैं ह्यूमर के जरिए भड़ास निकालता हूं। मैं उसी मंशा के साथ ट्वीट करता हूं, जिसके साथ आरके लक्ष्‍मण कार्टून बनाया करते । मैं उनसे बेहद प्रभावित हूं।”

Courtesy: Janta Ka Reporter
 

अयलान कुर्दी की तरह इस मासूम की लाश ने पूरी दुनिया को झकझोरा

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दो साल पहले टुर्की के समुंद्र तट पर औंधे मुंह पड़े मासूम अयलान कुर्दी की लाश ने पूरी दुनिया को झकझोर कर रख दिया था। डेढ़ साल के मासूम कुर्दी की मासूम से तस्वीर ने पूरी दुनिया का ध्यान तो अपनी ओर खींचा ही था दशकों से गृह युद्ध में फंसे देशों पर भी सवाल खड़ा कर दिया था। 

Aylan Kurdi

अयलान कुर्दी जैसी दिलों को झकझोरती एक और तस्वीर दुनिया के सामने आई है। यह तस्वीर बानगी है गृह युद्ध जैसे हालातों से जूझ रहे म्यामांर में रोहिंग्या मुसलमानों पर हो रहे जुल्म और ज्यादती की। 

सीएनएन की रिपोर्ट के अनुसार 16 साल के इस मासूम का नाम मोहम्मद शोहयत है। खबर के अनुसार उसका परिवार म्यामांर में हिंसा से बचने के लिए उसका परिवार भागकर बांग्लादेश के लिए निकला था। इसी बीच मासूम की मौत हो गई और उसकी लाश तैर कर बांग्लादेश म्यामांर सीमा पर स्थित नफ नदी के तट पर पहुंच गई।

पूरी खबर के लिए यहाँ क्लिक करें

साभार: अमर उजाला

क्या हिंदुस्तान टाइम्स के संपादक शिशिर गुप्ता ने मोदी के लिए केजरीवाल सरकार पर जासूसी की थी ?

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने हिन्दुस्तान टाइम्स के पत्रकार को तत्काल बर्खास्त करने की मांग की है। जिस पर आरोप है कि उसने केंद्र की भाजपा सरकार के इशारे पर राष्ट्रीय राजधानी में निर्वाचित आम आदमी पार्टी सरकार की जासूसी की है।

AK Tweet

केजरीवाल ने ट्विटर पर लिखा, “हिंदुस्तान टाइम्स के कार्यकारी संपादक को आम आदमी पार्टी सरकार के खिलाफ कार्रवाई करने का इशारा पीएमओ से मिला। क्या शोभना भारतिया (मालिक) अपने संपादक को बर्खास्त करेंगी ? हिंदुस्तान टाइम्स की साख दांव पर है। ”

 

एक चौंकाने वाले घुलासे में सामने आया है कि हिंदुस्तान टाइम्स के कार्यकारी संपादक शिशिर गुप्ता ने कथित तौर पर केंद्र सरकार के इशारे पर दिल्ली की केजरीवाल सरकार पर जासूसी करने के लिए एक वाहक के रूप में काम किया था।

फ्रंटलाइन पत्रिका की एक कवर स्टोरी में किए गए खुलासे के मुताबिक गुप्ता ने जिन पर हमेशा भाजपा सरकार का करीब माना जाता रहा है। भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह , विशेष कार्य अधिकारी पीएमओ(आईटी)हिरेन जोशी को 28 मार्च 2015 को एक ई-मेल भेजा था।

हिंदुस्तान टाइम्स

आम आदमी पार्टी की दिल्ली में बीजेपी पर शानदार जीत के मुश्किल से एक महीने बाद गुप्ता ने अपने मेल के सब्जेक्ट में लिखा “केजरीवाल केन्द्र के खिलाफ ” दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र में केंद्र सरकार के सभी अधिकार रद्द करने की राह पर हैं। न तो गृह मंत्रालय और न ही भाजपा विधायक / प्रदेश इकाई में लड़ने के लिए कुछ भी कर रही।

“दिल्ली सरकार में चर्चा है कि भाजपा आगामी बिहार चुनाव पर इसके प्रभाव के कारण केजरीवाल के साथ मुद्दों बढ़ाने के लिए कुछ भी नहीं करेगी। ”

गुप्ता ने दिल्ली के मुख्यमंत्री और उनकी सरकार द्वारा उठाए गए नौ विशेष फैसलों की लिस्ट बनाई और उस पर लिखा ” केजरीवाल द्वारा उल्लंघन के उदाहरण “

 

उल्लंघन के उदाहरण का हवाला देते हुए गुप्ता ने लिखा कि कैसे केजरीवाल सरकार अब सार्वजनिक व्यवस्था, पुलिस और भूमि मुख्यमंत्री कार्यालय के माध्यम से फाइले भेजने की योजना बना रही है। पहले उन्होंने एलजी के कार्यालय को फाइले भेजी और इस मुद्दे पर लडाई सार्वजनिक हुई।

दिलचस्प बात ये है, एलजी नजीब जंग ने बाद में केजरीवाल से कहा कि वरिष्ठ नौकरशाहों से फाइल उन्हे सीधी भेजी जाएगी।

गुप्ता के ईमेल में शाह या जोशी से प्रतिक्रिया प्राप्त करने का प्रयास नही दिखता बल्कि केजरीवाल सरकार की योजना पर अपडेट रखने और देने पर ज्यादा दिखाई पड़ता है।

एक और इत्तेफाक में बस कुछ ही दिन बाद, हिंदुस्तान टाइम्स के 1 अप्रैल नई दिल्ली संस्करण पर गुप्ता की बाइलाइन स्टोरी लगी।

गुप्ता की रिपोर्ट के शीर्षक में सुझाव दिया गया केजरीवाल अपने अधिकार क्षेत्र से ज्यादा टकराव की राह पर अधिक बढ़ रहे थे।  दिल्ली के मुख्यमंत्री केजरीवाल एलजी जंग को परेशान कर रहे हैं ”

गुप्ता ने आगे लिखा है, “दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल और लेफ्टिनेंट गवर्नर नजीब जंग टकराव की राह पर हैं। आम आदमी पार्टी के नेताआों को निर्देश है कि पुलिस, सार्वजनिक व्यवस्था और भूमि के आरक्षित विषयों से संबंधित सभी फाइलों को उनके माध्यम भेजी जाएं।”

गुप्ता ने इन आरोपों से इनकार किया है और कहा कि ई-मेल एक खबर लिखने के लिए और  पीएमओ, भाजपा पार्टी अध्यक्ष की प्रतिक्रिया और “निष्कर्ष” की तलाश के लिए भेजा गया था।

गुप्ता के इनकार को एक तरफ रखते हुए, ऐसा लगता है कि पीएमओ ने उस ई- मेल को काफी गंभीरता से लिया और कथित तौर पर कार्रवाई का आदेश भी दिया।

31 मार्च को प्रधानमंत्री कार्यालय के शीर्ष अधिकारी नृपेंद्र मिश्रा ने कथित तौर पर गृह मंत्रालय में अपर सचिव (सीएस) अनंत कुमार सिंह को अपने कार्यालय में बुलाया और कम से कम पांच दिन में गुप्ता के ईमेल पर एक “तथ्यात्मक रिपोर्ट” की मांग की।

अनंत कुमार सिंह ने लिखा, “आज दोपहर 12.30 बजे मुझे प्रधानमंत्री के प्रधान सचिव द्वारा बुलाया गया था उन्होंने मुझे दिनांकित 2015/03/28 श्री शिशिर गुप्ता, जिसे फ्लैग ‘ए’ में रखा गया है और कहा है कि ई मेल पर एक तथ्यात्मक रिपोर्ट शुक्रवार से पहले भेज दी जाए। कार्यालय बुधवार के बाद बंद हो रहे हैं। बुधवार शाम उपराज्यपाल (एलजी) से रिपोर्ट तलाशना उचित होगा। जिस कारण रिर्पोट प्रधानमंत्री कार्यालय में समय से पहुंच जाएगी। तदनुसार, एक पत्र में एलजी को संबोधित करते हुए तथ्यात्मक विवरण और मेल के ऊपर लिखे गए उल्लेख पर उनकी राय मांगी।”

आप यहा पूरी स्टोरी पढ़ सकते हैंः

Courtesy: Janta Ka Reporter

 

मध्य प्रदेश: नकली नोट छापने वाला भाजपा पार्षद का भतीजा फरार

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इंदौर। तमाम तरह के अवैध कामों में लिप्त लोगों में से ज्यादातर का भाजपा कनेक्शन निकल रहा है। नकली नोटों का गोरखधंधा हो या भारी मात्रा में नए नोट पकड़े जाने का, ज्यदातर जगह भाजपा नेताओं का कनेक्शन निकल रहा है। मध्य प्रदेश पुलिस को एक बड़ी सफलता हाथ लगी है। पुलिस ने सोमवार को दो नाबालिगों से पुछताछ की। बाद में दो अन्य युवकों की गिरफ्तारी की, उनके पास से अवैध 8.4 लाख के नकली नोट बरामद किए हैं। नकली नोट छापने का मुख्य सरगना भाजपा पार्षद आरती जीवन गुरू का भतीजा ललित तिवारी अभी फरार है। 

BJP man
 
मध्य प्रदेश के एडीजी वी. मधुकुमार ने कहा कि नोटबंदी के बाद ये प्रदेश का सबसे बड़ा मामला है, जिसमें पुलिस को भ्रष्टाचार के खिलाफ एक बड़ी जीत हासिल हुई है। इतनी भारी मात्रा में नकली नोटों का पकड़ा जाना कोई छोटी घटना नहीं है। पुलिस के नकली नोटजब्त करने के बाद से ही ललित समेत अन्य तीन आरोपी शहर से फरार हो गए हैं। पुलिस लगातार उनके छिपने के संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही है। 
 
भाजपा पार्षद अजीत तिवारी से पुछताछ करने पर एक बात सामने आई के ललित तिवारी कुछ दिन पहले ही नोटों की गड्डी लेकर इंदौर आया था। उसके इंदौर आने का मकसद किसी से मिलना था। पुलिस ललित तिवारी का इंदौर कनेक्शन खंगालने में लग गई है। नाबालिगों के फोन जांच से भाजयुमो नेता जयंत गरूड़ का नाम भी सामने आया है। हालांकि फोन एक बार ही आया था उसके बाद से दोनों के बीच कोई संम्पर्क नही हुआ।
 
पुलिस ने मकान पर छापा मार कर प्रिंटर, स्केनर, मॉनीटर, सीपीयू, की बोर्ड, नोट छापने में प्रयुक्त कागज, कटर आदि जब्त कर लिया है। सोमवार को ललित के दो साथी को गिरफ्तार कर लिया गया है, जिसके पास से आठ लाख रू. के नकली नोट मिले हैं। 

आरोपी ललित तिवारी फिलहाल बेरोजगार था। एक साल पहले उसके कपड़े की दुकान थी, साथ ही फुटपाथ पर टेडीबियर बेचा करता था। सूरत से उसने कम्प्यूटर फोटो एडिटिंग व डिजाइनिंग का कोर्स किया है। ललित ने बारहवीं तक पढ़ाई की है। 
 
दो हजार के नए नोटों के साथ पकड़े गए नाबालिगों ने बताया कि उसे ये नकली नोट नागाबाबा तलाई मेट्रो टॉकिज की गली में स्थित खेमानीजी के मकान को ललित ने किराए पर लिया हुआ है और वही कुछ लोगो के साथ मिलकर नकली नोटों की छपाई किया करता था।

जब इस मामले की पड़ताल में पुलिस पूर्व भाजपा पार्षद जीवन गुरू से बातचीत करने पहुंची तो, अपने बाचाव में उन्होंने कहा कि ललित मेरा भतीजा है लेकिन इस समय फोन बंद आ रहा है। जब ललित मिले तो उससे पुछिए के वो किससे इशारे पर नकली नोट छापने का धंधा कर रहा था।

Courtesy: National Dastak

 

Big jolt to Modi ‘s crackdown on black money? 97% cash back in banks, says report

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As of December 30, banks have received Rs 14.97 trillion in old currency, the report states.

demonetisation

PM Narendra Modi’s much hyped demonetistation move against black money and corruption has been dealt a severe blow as almost 97% of the banned currency has been accounted for and deposited in banks.  

Banks have received 14.97 trillion rupees as of Dec. 30, the deadline for handing in the old bank notes. Banks have disbursed about 8 trillion rupees in new currency bills, the people with knowledge of the matter said. The figures of bank notes deposited are provisional and may change, they added. Finance Ministry's spokesman D.S. Malik didn't respond to a call and a message sent to his mobile phone.
 
Indians have deposited nearly all the currency bills outlawed at the end of the deadline last year, according to people with knowledge of the matter, dealing a blow to Prime Minister Narendra Modi's drive to unearth unaccounted wealth and fight corruption.

Indians have deposited currency bills for almost all the banned notes by the December 30 deadline, a Bloomberg report by Siddhartha Singh and Bibhudatta Pradhan states. A full validation of the bank notes is a set back for Modi who had been relying on this move to burnish his administration's corruption fighting credentials and boost its popularity ahead of key state elections. The anti-corruption measure has dented economic growth and forced millions into lengthy bank queues, although it remains broadly popular. 

As of December 30, banks have received Rs 14.97 trillion in old currency, the report states.

Around Rs 5 trillion of the Rs 15.4 trillion rendered useless since demonetisation was announced on November 8, had been estimated by the government to be black money since it had not been declared.

“The prime minister had been ill advised and the government was not prepared to handle the situation. The government expectation has been belied,” said Nilakantha Rath, honorary fellow at the Indian School of Political Economy.

Although the serpentine queues outside banks and ATMs which were seen in the immediate aftermath of the demonetisation announcement have reduced, popular opinion remains divided over whether the move was warranted.

There are indications that India which is one of the world’s fastest growing economies could be hurt by the cash clampdown.

For the second straight month, the Nikkei India Services Purchasing Managers’ Index contracted in December, the report adds.