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गुजरात की 19 वर्षीय निर्भया के साथ हुए अमानवीय बलात्कार के खिलाफ सोशल मीडिया पर मांगा जा रहा है इंसाफ

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गुजरात की निर्भया के लिए सोशल मीडिया पर इंसाफ मांगा जा रहा है। बलात्कार की घटनाएं तो देश में रोज कहीं ना कहीं होती है लेकिन जब नरपिशाच अमानवीय तरीके से इस जघन्य अपराध को अंजाम देते है तब नाम आता है निर्भया का। गुजरात के फतेहपुरा तहसील में 19 वर्षीय नवयुवती के साथ इसी तरह से बलात्कार किया गया। जिसके लिए #Justice4GujaratKiNirbhaya हैशटेग चलाकर सोशल मीडिया पर इंसाफ मांगा जा रहा है।
निर्भयाफतेपुरा तहसील के एक गांव में एक शख्स ने सरपंच पद के लिए फार्म भरा, तो 8 लोगों ने उसके घर पर हमला कर दिया। इस दौरान फार्म भरने वाले की बेटी वहां से भागने लगी तो हमलावरों में से एक व्यक्ति ने उसके साथ बलात्कार  किया। यही नहीं, उसके बाद लड़की को पेशाब से नहला दिया गया और उसके मुंह और शरीर पर पेशाब करते हुए दबंगों ने जरा भी झिझक नहीं दिखाई।
मीडिया रिपोट्स के मुताबिक, फतेपुरा तहसील में रहने वाले एक व्यक्ति ने सरपंच पद के लिए फार्म भरा। इस पर गांव की पंचायत अध्यक्ष के पति नरेंद्र भाई डामोर, दिलीप भाई वगेला, गलुभाई, अरविंद भाई, कांतिलाल डामोर, भुरे सिंह भाई डामोर और मुकेश भाई घातक हथियार लेकर फार्म भरने वाले के घर पहुंच गए।

 

हमारे खिलाफ फार्म क्यों भरा, इस वाक्य के साथ उन्होंने उसके घर पर पत्थरबाजी शुरू कर दी। इस दौरान फार्म भरने वाले की 19 वर्षीय बेटी बचने के लिए वहां से भागी, तो एक पत्थर उसे भी लगा, जिससे वह वहीं गिर पड़ी। पहले भुरसिंह डामोर ने लकड़ी के प्रहार से युवती को घायल कर दिया।

उसके बाद अरविंद ने उससे गाली-गलौच करते हुए उसके बाल पकड़कर उसे खूब मारा। इसके बाद अन्य लोगों के साथ नरेंद्र डामोर भी वहां पहुंच गया। उसने युवती से बलात्कार किया। उसके बाद बेतहाशा गालियां देते हुए युवती पर यूरीन कर दिया।

सुखसर के पीएसआई पी.एच.जाडेजा ने इस बारें में बताया कि घर में भी काफी तोड़फोड़ की गई है। युवती को दाहोद भेज दिया गया। युवती से बलात्कार के बाद एफआईआर दर्ज की गई। उसके बाद उसने दाहोद में मेडिकल जांच की इच्छा व्यक्त की। इससे उसे परिवार के साथ सरकारी अस्पताल भेज दिया गया। अभी तक मेडिकल रिपोर्ट नहीं मिली है।
 

इस घटना से युवती के गांव समेत पूरे तहसील में हड़कम्प मचा हुआ है। परिवार के साथ पुलिस स्टेशन पहुंची युवती ने हमलावरों और उसके साथ बलात्कार करने वाले के खिलाफ रिपोर्ट लिखवाई है। सुखसर पुलिस ने अपराध दर्ज कर लिया गया है। इस घटना के दो सप्ताह से अधिक बीत जाने पर भी अभी तक गुजरात की इस निर्भया को इंसाफ नहीं मिला है इसलिए सोशल मीडिया पर #Justice4GujaratKiNirbhaya हैशटेग चलाकर इंसाफ मांगा जा रहा है।

Courtesy: Janatakareporter
 

कैशलेस की घूंट पिलाने के लिए सरकार ने चलाए ऐड के बाण

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कैशलेस की घूंट पिलाने के लिए सरकार ने चलाए ऐड के बाण
 

नई दिल्ली। पीएम मोदी ने 8 नवंबर को नोटबंदी का फरमान सुना दिया। नोटबंदी के बाद से ही देश की जनता परेशान है। जहां एक तरफ नोटबंदी को कालाधन और भ्रष्टाचार पर सर्जिकल स्ट्राइक बताकर इसे जबरन देश की जनता को सौंप दिया गया, वहीं अब कैशलेस इकॉनमी की बात कहकर सरकार जनता को और दर्द दे रही है। यही नहीं फाइनेंस मिनिस्ट्री कैशलेस के फायदे बताने के लिए बकायदा ऐड कैंपेन की सीरीज लॉन्च कर रही है। 
 
इसके शुरुआती ऐड को बनाने का काम ऑगिल्वी एंड मैथर (ओएंडएम) और क्रेयॉन्स ऐडवर्टाइजिंग को सौंपा गया था। ये वही ऐड कंपनियां हैं जिन्हें बीजेपी ने यूपी चुनाव के लिए भी ऐड कैंपेन का काम सौंपा है।
 

क्रेयॉन्स के प्रेसिडेंट रंजन बारगोत्रा ने कहा, 'नोटबंदी का पहला कैंपेन हमने ही किया था। इसमें बताया गया था कि 2.5 लाख रुपये तक के डिपॉजिट के लिए जांच नहीं होगी।' उन्होंने बताया कि नोटबंदी पर हमारी एजेंसी ने सिर्फ यही ऐड कैंपेन किया था। इस पर एक शुरुआती ऐड कैंपेन ओएंडएम ने भी किया था। इसकी पुष्टि कंपनी के एग्जिक्यूटिव चेयरमैन पीयूष पांडे ने की है।
 
 
एजेंसी के एक सीनियर एग्जिक्यूटिव ने बताया, 'यह कैंपेन खासतौर पर होर्डिंग्स के जरिए किया गया था। इसमें आम लोगों की इस पर राय दी गई थी। इसमें हर मेसेज का अंत एक पंचलाइन के साथ होता था- मेरा पैसा सुरक्षित है।' कैंपेन इसलिए शुरू किया गया था ताकि आम लोगों के मन से यह डर दूर किया जा सके कि उनकी कैश की बचत का कोई मतलब नहीं रह गया है।
 
अब सरकार 'कैश हुआ पुराना, अब डिजिटल का है जमाना' और 'बिना नकद लेनदेन, सरल है, सुरक्षित है, समय की पुकार है' जैसे नारे लेकर आई है। कैशलेस ट्रांजैक्शंस को बढ़ावा देने के लिए हालिया ऐड कैंपेन तैयार करने का काम स्पैन कम्युनिकेशंस को दिया गया है। यह दिल्ली बेस्ड मीडिया एजेंसी है, जिसने काफी सरकारी कॉन्ट्रैक्ट्स किए हैं। 
 

एजेंसी के चीफ नरेश खेत्रपाल ने इकनॉमिक टाइम्स को बताया, 'सायबर सिक्योरिटी अवेयरनेस को लेकर हमने देश भर में एक कैंपेन शुरू किया। इसके बाद नोटबंदी और कैशलेस इकनॉमी पर कैंपेन लाया गया। अभी यह कैंपेन चल रहा है और इसे इंडियन बैंक्स एसोसिएशन और फाइनेंस मिनिस्ट्री का सपोर्ट मिला हुआ है।'
 
 
स्पैन सोशल मीडिया पर इस मेसेज के वीडियो डाल चुकी है। इनमें से एक ऐड में एक्टर अजय देवगन भी दिखते हैं। स्पैन को सरकार ने मुद्रा योजना, स्टैंडअप इंडिया और दूसरी सोशल सिक्योरिटी स्कीम्स के लिए भी अगले साल भर का ऐड कैंपेन बनाने का कॉन्ट्रैक्ट दिया हुआ है।

Courtesy: Nationaldastak

 

भाजपा सरकार ने किया सैकड़ों मुस्लिम परिवारों को बेघर

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भाजपा सरकार ने किया सैकड़ों मुस्लिम परिवारों को बेघर
 

मेवात। हरियाणा की बीजेपी शासित खट्टर सरकार ने हांड कंपा देने वाली सर्दी में सैकड़ों मुस्लिम परिवारों के घर तोड़कर उन्हे बेघर कर दिया है। मामला हरियाणा के मेवात जिले का है। जहां प्रशासन ने सीआरपीएफ कैंप के लिए टूंडलाका गांव में 80 घरों को तोड़ दिया।
 
घरों को तोड़े जाने की वजह से सभी मुस्लिम परिवार खुले आसमान के नीचे रहने को मजबूर हैं। हांड कंपा देने वाली सर्दी को देखते हुए कुछ परिवारों ने टेंट और तंबू लगा लिए हैं लेकिन कुछ परिवारों को यह भी नसीब नहीं है।
 
पीड़ित लोगों का कहना हैं कि वह इस जमीन पर पिछले 40 वर्षों से रहते आएं हैं। प्रशासन ने उन्हें मकानों को तोड़े जाने से पहले सूचित भी नहीं किया जिससे वह अपने सामान और रहने की दूसरी व्यवस्था भी नहीं कर पाए। पीड़ितों ने बताया कि इस ठंडी के आलम वह खेतों में खुले आसमान के नीचे रह रहे हैं, छोटे-छोटे बच्चे रातभर ठंड से कांपते हैं। सर्दी की हर रात उनपर किसी आपदा से कम नहीं है।

मेवात विकास सभा के अध्यक्ष उमर मोहम्मद ने बताया कि प्रशासन ने गलत तरीके से करीब 40 वर्षों से बने हुए मकानों को तोडा है। उन्होंने कहा कि चकबंदी के दौरान जो रक्बा बचा था वह किसानों कि पट्टी, शामलात और जुमला मालकान का है। मगर ग्राम पंचायत ने 1965 में इस जमीन का इंतकाल गलत तरीके से अपने नाम करा लिया था। जिसके बाद यह मामला कोर्ट गया और अब भी यह मामला जिला न्यायलय के समक्ष विचाराधीन है।
 
आपको बता दें कि मेवात जिले में सीआरपीएफ कैंप प्रस्तावित है। इसके लिए गांव की जमीन ली जा रही है। इस क्रम में प्रशासन ने 80 मुस्लिम परिवारों के घरों को ढहा दिया है। इस जमीन पर ये परिवार पिछले 40 सालों से रह रहे थे। वही प्रशासन का कहना है कि ये जमीन ग्राम समाज की है जबकि लोगों का कहना है कि ये जमीन उनकी है जिसको धोखे से ग्राम समाज की बना दिया गया।

Courtesy: Nationaldastak
 

 

बदलता दौर: ‘मनुस्मृति दहन दिवस’ पर ओबीसी वर्ग के 5000 लोगों ने अपनाया बौद्ध धर्म

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 बदलता दौर: 'मनुस्मृति दहन दिवस' पर ओबीसी वर्ग के 5000 लोगों ने अपनाया बौद्ध धर्म 
 

नागपुर। महाराष्ट्र की दीक्षाभूमि में 14 अक्टूबर 1956 में हुई ऐतिहासिक धर्मांतरण की यादें उस समय ताजा हो गई जब रविवार, 25 दिसंबर को मनुस्मृति दहन दिवस पर राज्य और बाहर के सैकड़ों ओबीसी वर्ग के लोगों एंव 'वी लव बाबासाहेब' संगठन के युवाओं ने दीक्षाभूमि पर बौद्ध धर्म स्वीकार किया। बौद्ध धम्म का संदेश देने वाले ओबीसी नेता हनुमंत उपरे के निधन के बाद उनके पुत्र ने लाखों ओबीसी बंधुओं को मूल धर्म में लौटने का आह्वान किया। 
 
राज्य के सभी जिलों के ओबीसी समाज ने धर्मांतरण समारोह के लिए पंजीयन कराया था। राजस्थान, बिहार, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और गुजरात राज्यों के भी ओबीसी व अनुसूचित जाति के लोगो ने दीक्षाभूमि पर धर्मांतरण किया। इसके पहले सुबह 12 बजे संविधान चौक से धम्म रैली निकाली गई। 
 
रैली में सबसे आगे भिक्षु, उनके पीछे धम्मदीक्षा लेने वाले ओबीसी समाज के लोग तथा उपासक-उपासिकाएं चले। रैली में बहुत हर्षोल्लास का वातवरण देखा गया। गौरतलब है कि 2006 में साहित्यकार लक्ष्मण माने ने बौद्ध धर्म ग्रहण किया था।
 
 

आपको बता दें कि धर्म ग्रहण करने का यह पहला चरण था। पहले चरण में ही हजारों लोगों बौद्ध धर्म में प्रवेश किया। इसके बाद चरणबद्ध ढंग से 3744 जातियों के 10 लाख ओबीसी समाज के लोग बौद्ध धर्म स्वीकार करेंगे। 
 
सत्यशेधक ओबीसी परिषद तथा सार्वजनिक धम्मदीक्षा परिषद दीक्षाभूमि द्वारा संयुक्त रूप से कार्यक्रम का आयोजन किया गया था। भदंत आर्य नागार्जुन सुरेई ससाई के हाथों दोपहर 3 बजे धम्मदीक्षा समारोह प्रारम्भ हुआ। डॉ. बाबासाहेब आंबेडकर स्मारक समिति के कार्यवाहक सदानंद फुलझेले प्रमुखता से उपस्थित रहें। 
 
धर्मांतरण करने वालों को बुद्ध एंड हीज धम्म, धम्मविधि पूजा-पाठ, 22 प्रतिज्ञा तथा बुद्ध की मूर्ति भेंट की गई। संदीप हनुमंतराव उपरे एंव उनके परिवारजनो के साथ ओबीसी बंधुओं ने बौद्ध धर्म की दीक्षा ली।

Courtesy: Nationaldastak