Home Blog Page 2311

महाराष्ट्र बीजेपी अध्यक्ष का विवादित बयान, चुनाव से पहले अगर ‘लक्ष्मी’ घर आए तो जाने मत दो

0

महाराष्‍ट्र के भाजपा प्रदेश अध्‍यक्ष रावसाहेब दानवे एक विवादित बयान देकर चर्चाओं में आ गए उन्होंने कहा कि चुनाव से पहले की शाम बहुत महत्वपूर्ण होती है क्योंकि आपको अचानक लक्ष्मी के दर्शन होते हैं। अगर ऐसी लक्ष्मी आपके दरवाजे पर आ रही है तो उसका स्वागत कीजिए।

रावसाहेब दानवे

दानवे ने निकाय चुनाव के तीसरे चरण के एक दिन पहले पैठन में एक सभा को संबोधित करते हुए कहा कि चुनाव से पहले की शाम बहुत महत्वपूर्ण होती है क्योंकि आपको अचानक लक्ष्मी के दर्शन होते हैं। अगर ऐसी लक्ष्मी आपके दरवाजे पर आ रही है तो उसका स्वागत कीजिए। लेकिन आपने जिसे भी वोट देने का निश्चय किया है उस फैसले पर अडिग रहें।

 

मीडिया रिपोट्स के अनुसार, सामाजिक कार्यकर्ता विश्वंभर चौधरी और अंजलि दमानिया ने राज्य चुनाव आयोग से भाजपा के प्रदेश अध्यक्ष रावसाहब दानवे के विवादित बयान पर पार्टी को कारण बताओ नोटिस की मांग की। दमानिया के मुताबिक, दानवे ने ऐसा बयान देकर वोटरों को वोट के बदले नोट के लिए प्रोत्साहित किया है। उनका का यह बयान चुनाव आचार संहिता का उल्लंघन है। साथ ही यह गैरलोकतांत्रिक व भ्रष्टाचार को बढ़ावा देने वाला भी है।

इसके अलावा कांग्रेस ने राज्य चुनाव आयोग से कहा कि उनके खिलाफ चुनाव आचार संहिता उल्लंघन का मामला दर्ज किया जाए। राज्य पार्टी के प्रवक्ता सचिन सावंत ने कहा, दानवे का बयान वोटरों से चुनाव प्रचार के दौरान धन स्वीकार करने की अपील करने जैसा है।

जबकि दूसरी और राज्य चुनाव आयुक्त जेएस सहरिया ने बताया कि दानवे को मामले में कारण बताओ नोटिस जारी किया जा चुका है।

Courtesy: Janta Ka Reporter
 

Old notes exceeding more than Rs 5,000 can be deposited only once till 30 December

0

In yet another new notification, the central government has now announced that deposits of old Rs 500 and Rs 1,000 notes worth more than Rs 5,000 into bank accounts can be made only once till 30 December.

A report by The Economic Times, said that the Modi government had announced fresh restrictions on deposits to check ‘laundering of unaccounted cash’ using bank accounts.
 

 

Chinese media

“Large deposits cannot be made multiple times in bank accounts. People can deposit up to Rs 5,000 on which there is no restriction,” a senior finance ministry official told ET.

It’s, however, not clear whether the restriction will apply retrospectively and bar anyone, who has already made some deposits of more than Rs 5000 into their accounts since 8 November.

The Reserve Bank of India is likely to issue fresh circular later on Monday announcing measures to check deposits over Rs 5,000.

More to follow

Courtesy: Janta Ka Reporter
 

‘RSS मानसिकता के चलते मोदीजी मुसलमान को नहीं बनने देना चाहते सेनाध्‍यक्ष’

0

नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने 17 दिसंबर को नए थलसेनाध्‍यक्ष के रूप में लेफ्टिनेंट जनरल बिपिन रावत के नाम का एलान किया जिसके बाद सरकार लगातार विपक्ष के निशाने पर चल रही है। उन्हें चीफ चुने जाने के लिए कमांड चीफ लेफ्टिनेंट प्रवीण बक्शी और दक्षिणी कमान के आर्मी चीफ लेफ्टिनेंट पीएम हारिज को नजरअंदाज किया गया। 

Modi

जहां सरकार का कहना है कि बिपिन को मेरिट के आधार पर चुना गया है। वहीं कांग्रेस नेता शहजाद पूनावाला ने नए सेनाध्‍यक्ष की नियुक्ति को लेकर नरेंद्र मोदी सरकार पर साम्‍प्रदायिक भेदभाव का आरोप लगाया है। पूनावाला ने ट्वीट कर कहा कि पीएम मोदी लेफ्टिनेंट जनरल मोहम्‍मद अली हरीज को पहला मुस्लिम जनरल नहीं बनाना चाहते थे, इसलिए दो वरिष्‍ठ सैन्‍य अधिकारियों की अनदेखी की गई। 
 
शहजाद पूनावाला ने ट्वीट कर कहा, 'अगर मोदी बिपिन रावत को बिना बारी के आर्मी चीफ नहीं बनाते तो हरीज लेफ्टिनेंट बक्‍शी के कार्यकाल के बाद सेना के पहले मुस्लिम प्रमुख होते। लेकिन मोदी ऐसा नहीं चाहते थे।'
 
एक दूसरे ट्वीट में शहजाद ने लिखा कि शायद आरएसएस मानसिकता के चलते मोदी सरकार किसी अल्‍पसंख्‍यक के सेना प्रमुख बनने को सहन नहीं कर सकती थी। उन्‍होंने आगे लिखा, ”भूतकाल में एक लेफ्टिनेंट जनरल की अनदेखी की गई थी दो की कभी नहीं हुई। अब बक्‍शी को सीडीएस बनाने की बात की जा रही है। पूनावाला ने कहा कि हरीज जो चीज डिजर्व करते थे वो मोदी सरकार के चलते नहीं मिल पाई। यदि 1983 को दोहराया भी गया तो हरीज चीफ ऑफ आर्मी स्‍टाफ होते। इस अभूतपूर्व कदम के पीछे मोदी की मुस्लिम विरोधी आरएसएस मानसिकता है।”
 
गौरतलब है 1983 में इंदिरा गांधी की सरकार के समय भी सीनियर अधिकारी को नजरअंदाज कर जूनियर को सेनाध्‍यक्ष बनाया गया था। उस समय जनरल एएस वैद्य को आर्मी चीफ चुना गया था। इस पर उनके सीनियर लेफ्टिनेंट एसके सिन्हा ने विरोध किया था। वहीं 1988 में एयर मार्शल एमएम सिंह की जगह एसके मेहरा को IAF चीफ बना दिया गया था।

Courtesy: National Dastak