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आसमान में धान बोने वाले रमाशंकर यादव ‘विद्रोही’ की पहली बरसी

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(पगले!…अगर ज़मीन पर भगवान जम सकता है…तो आसमान में धान भी जम सकता है….)

कुछ ऐसी शाख्सियत के मालिक थे रमाशंकर यादव 'विद्रोही'। जिन्होंने दुनिया की लिखी-लिखाई बातों के बहकावे में न आकर अपनी बात कहने की कोशिश की। उपरोक्त लाइनों से ही उन्होंने समाज के उन लोगों को आईना दिखाने की कोशिश की जिनके लिए ढोंग, पाखंड और ध्रुवीकरण ही एकमात्र धर्म है। 

Ramashankar Vidrohi
 
हिंदी साहित्य के हलकों में रमाशंकर यादव 'विद्रोही' भले ही अनजान हों लेकिन दिल्ली स्थित जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय (जेएनयू) के छात्रों के बीच इन कवि की कविताएं खासी लोकप्रिय रही हैं। प्रगतिशील परंपरा के इस कवि की रचनाओं का एकमात्र प्रकाशित संग्रह 'नई खेती' है। इसका प्रकाशन इनके जीवन के अंतिम दौर 2011 ई. में हुआ। वे स्नातकोत्तर छात्र के रूप में जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय से जुड़े। यह जुड़ाव आजीवन बना रहा। 
 
उनका जन्म 3 दिसम्बर 1957 को उत्तर प्रदेश के सुल्तानपुर जिले के अंतर्गत अइरी फिरोजपुर गांव में हुआ था। उनकी आरंभिक शिक्षा गांव में ही हुई। सुल्तानपुर में उन्होंने स्नातक किया। इसके बाद उन्होंने कमला नेहरू इंस्टीट्यूट में वकालत में दाखिला लिया। वे इसे पूरा नहीं कर सके। 
 
उन्होंने 1980 में जवाहरलाल नेहरु विश्वविद्यालय में स्नातकोत्तर में प्रवेश लिया। 1983 में छात्र-आंदोलन के बाद उन्हें जेएनयू से निकाल दिया गया। इसके बावजूद वे आजीवन जेएनयू में ही रहे।

विद्रोही मुख्यतः प्रगतिशील चेतना के कवि हैं। उनकी कविताएं लंबे समय तक अप्रकाशित और उनकी स्मृति में सुरक्षित रही। वे अपनी कविता सुनाने के अंदाज के कारण बहुत लोकप्रीय रहे। 2011 ई॰ में इनकी रचनाओं का प्रकाशन 'नई खेती' शीर्षक संग्रह से हुआ।

नितिन पमनानी ने विद्रोही जी के जीवन संघर्ष पर आधारित एक वृत्तचित्र आई एम योर पोएट (मैं तुम्हारा कवि हूं) हिंदी और अवधी में बनाया है। मुंबई अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में इस वृत्तचित्र ने अंतर्राष्ट्रीय स्पर्धा श्रेणी में सर्वश्रेष्ठ वृत्तचित्र का गोल्डन कौंच पुरस्कार जीता।
 
रमाशंकर यादव 'विद्रोही' की कुछ कविताएं-

नई खेती
मैं किसान हूं
आसमान में धान बो रहा हूं
कुछ लोग कह रहे हैं
कि पगले! आसमान में धान नहीं जमा करता
मैं कहता हूं पगले!
अगर ज़मीन पर भगवान जम सकता है
तो आसमान में धान भी जम सकता है
और अब तो दोनों में से कोई एक होकर रहेगा
या तो ज़मीन से भगवान उखड़ेगा
या आसमान में धान जमेगा।
 
औरतें
…इतिहास में वह पहली औरत कौन थी जिसे सबसे पहले जलाया गया?
मैं नहीं जानता
लेकिन जो भी रही हो मेरी मां रही होगी,
मेरी चिंता यह है कि भविष्य में वह आखिरी स्त्री कौन होगी
जिसे सबसे अंत में जलाया जाएगा?
मैं नहीं जानता
लेकिन जो भी होगी मेरी बेटी होगी
और यह मैं नहीं होने दूंगा।

मोहनजोदाड़ो
…और ये इंसान की बिखरी हुई हड्डियां
रोमन के गुलामों की भी हो सकती हैं और
बंगाल के जुलाहों की भी या फिर
वियतनामी, फ़िलिस्तीनी बच्चों की
साम्राज्य आख़िर साम्राज्य होता है
चाहे रोमन साम्राज्य हो, ब्रिटिश साम्राज्य हो
या अत्याधुनिक अमरीकी साम्राज्य
जिसका यही काम होता है कि
पहाड़ों पर पठारों पर नदी किनारे
सागर तीरे इंसानों की हड्डियां बिखेरना।
 
जन-गण-मन
मैं भी मरूंगा
और भारत के भाग्य विधाता भी मरेंगे
लेकिन मैं चाहता हूं
कि पहले जन-गण-मन अधिनायक मरें
फिर भारत भाग्य विधाता मरें
फिर साधू के काका मरें
यानी सारे बड़े-बड़े लोग पहले मर लें
फिर मैं मरूं- आराम से
उधर चल कर वसंत ऋतु में
जब दानों में दूध और आमों में बौर आ जाता है
या फिर तब जब महुवा चूने लगता है
या फिर तब जब वनबेला फूलती है
नदी किनारे मेरी चिता दहक कर महके
और मित्र सब करें दिल्लगी
कि ये विद्रोही भी क्या तगड़ा कवि था
कि सारे बड़े-बड़े लोगों को मारकर तब मरा।
 
प्रगतिशील चेतना और वाम विचारधारा का गढ़ माने जाने वाले जेएनयू कैंपस में 'विद्रोही' ने जीवन के कई वसंत गुजारे। 'विद्रोही' बिना किसी आय के स्रोत के छात्रों के सहयोग से ही कैंपस के अंदर जीवन बसर करते रहे। हालांकि कैंपस के पुराने छात्र उनकी मानसिक अस्वस्थता के बारे में भी जिक्र करते थे, पर उनका कहना था कि कभी भी उन्होंने किसी व्यक्ति को क्षति नहीं पहुंचाई है, न हीं अपशब्द कहे हैं।
 
वे कहते थे, "जेएनयू मेरी कर्मस्थली है, मैंने यहां के हॉस्टलों में, पहाड़ियों और जंगलों में अपने दिन गुज़ारे हैं।" अंतिम समय में उन्होंने ऑक्युपाई यूजीसी में जेएनयू के छात्रों के साथ हिस्सेदारी की। इसी दौरान 8 दिसंबर 2015 को उनका निधन हो गया।

Courtesy: National Dastak
 

पर्सनल लॉ बोर्ड संविधान से ऊपर नहीं, ‘तीन तलाक’ पर इलाहाबाद हाई कोर्ट की टिप्पणी

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तीन तलाक के मामले पर देश में चल रही बहस के बीच इलाहाबाद हाई कोर्ट ने आज एक बड़ी टिप्पणी की, कोर्ट ने तीन तलाक को असंवैधानिक बताते हुए कहा है कि इससे मुस्लिम महिलाओं के अधिकारों का हनन होता है।

teen-talaq

अदालत ने कहा है कि पर्सनल लॉ बोर्ड संविधान से ऊपर नही हो सकते। अदालत के मुताबिक ऐसे बोर्डों को भी संविधान के मुताबिक काम करना होगा. तीन तलाक के खिलाफ दायर याचिका पर सुनवाई करते हुए हाई कोर्ट ने ये बातें कहीं।
 

कोर्ट ने कहा, तीन तलाक क्रूरता है। यह मुस्लिम महिलाओं के संवैधानिक अधिकारों का हनन है। कोई भी पर्सनल लॉ बोर्ड संविधान से ऊपर नहीं हो सकता। यहां तक कि कोर्ट भी संविधान से ऊपर नहीं हो सकता। कुरान में कहा गया है कि जब सुलह के सभी रास्ते बंद हो जाएं तभी तलाक दिया जा सकता है। लेकिन धर्म गुरुओं ने इसकी गलत व्याख्या की है।
 

वहीं आल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने इस फैसले को शरियत के खिलाफ बताया है. बोर्ड अब इस फैसले को सर्वोच्च अदालत में चुनौती देगा।

 

केंद्र सरकार तीन तलाक के पक्ष में नहीं है। सरकार ने 7 अक्टूबर को सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दिया था कि तीन तलाक की संविधान में कोई जगह नहीं है। तीन तलाक और बहुविवाह की इस्लाम में कोई जगह नहीं है। इसके बाद सरकार ने मुस्लिम संगठनों की राय जानने के लिए 16 सवालों की प्रश्नावली भी तैयार की जिसका  ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड ने बहिष्कार करने का ऐलान किया। ट्रिपल तलाक के अलावा यूनिफॉर्म सिविल कोड के मुद्दे पर भी ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड केंद्र सरकार के रुख का विरोध कर रहा है।

समाजवादी पार्टी नेता अबू आज़मी ने इस फैसले पर कहा कि ट्रिपल तलाक का मामला पूरी तरह से धार्मिक मामला है। ट्रिपल तलाक का मतलब अलग है। संविधान देश का और कुरान शरियत दोनों अलग चीजें हैं। आडवाणी पाकिस्तान में पैदा हुए तो हिंदुस्तान आ गए। अगर कल हिंदुस्तान में कह दिया जाए कि हिंदू अपने मुर्दो को जला नहीं सकते, मंदिर नहीं जा सकते तो उनसे पूछा जाएगा कि उनका धर्म बड़ा या कानून बड़ा। हम अपने इस्लामिक कानून में दखलंदाजी नहीं चाहते।

Courtesy:  Janta Ka Reporter
 

अब पेटीएम का मतलब पे टू मोदी हो गया: राहुल गांधी

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नोटबंदी की घोषणा को एक महीना पूरा होने पर आज विपक्षी दलों ने संसद भवन परिसर में ‘काला दिवस’ मनाया और कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने इस निर्णय को लेकर प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी पर तीखा प्रहार करते हुए कहा कि उनके इस मूखर्तापूर्ण फैसले ने देश को बर्बाद कर दिया है।

राहुल गांधी

राहुल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि ई-वॉलेट सेवा पेटीएम का मतलब ‘पे टू मोदी’ है। नोटबंदी का फैसला लागू होने का एक महीना पूरा होने के मौके पर विपक्ष ने संसद परिसर में महात्मा गांधी की प्रतिमा के पास मौन विरोध किया। राहुल ने कहा, प्रधानमंत्री ने यह फैसला कुछ गिने-चुने लोगों के लिए लिया है और इसके लिए प्रत्येक विशेषज्ञ की राय को दरकिनार कर दिया गया है। उन्होंने कहा, लेकिन साहसी फैसले मूर्खतापूर्ण भी हो सकते हैं और इस मूर्खतापूर्ण फैसला ने देश को बर्बाद कर दिया है।

 

राहुल ने कहा कि हाउस को चलाने की जिम्मेदारी सरकार की है, हम चाहते हैं वोट हो, वोट होगा तो बीजेपी के लोग भी हमें वोट देंगे। प्रधानमंत्री पॉप कन्सर्ट में जा रहे हैं, लेकिन यहां नहीं आ रहे। यहां आएंगे तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाएगा। सरकार चर्चा नहीं चाहती है। राहुल ने कैशलेस ट्रांजेक्शन को लेकर भी मोदी को घेरा और नया जुमला उछाला- पेटीएम मतलब पे टू मोदी। जब उनसे सवाल पूछा गया कि पे टू मोदी क्यों है? उन्होंने जवाब दिया, लोकसभा में बोलने देंगे तो मैं सब साफ कर दूंगा।

मीडिया रिर्पोट्स के अनुसार, उन्होंने कहा, आखिरी बात मैं कहना चाहता हूं कि मोदी जी ने किसी को नहीं बताया था फैसले के बारे में। बंगाल बीजेपी ने फैसले से ठीक पहले पैसा जमा कराया, बिहार में ज़मीन खरीदी, कर्नाटक के बीजेपी नेता ने 500 करोड़ की शादी की, उनके ड्राइवर ने आत्महत्या कर ली। जिनको मालूम होना था, उन्हें सब मालूम था। बीजेपी के लोगों ने और मोदी जी ने उन्हे पहले ही बता दिया। नुकसान गरीबों का हुआ, काले धन वाले सब भाग गए, लाइन में एक भी अमीर आदमी नहीं दिखा, लाइन में गरीब लगे हैं। ये सूट-बूट की  सरकार का काम है।

Courtesy: Janta Ka Reporter
 

सरकार का एक और इमोशनल अत्याचार, आम जनता से रेल सब्सिडी छोड़ने की अपील

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नई दिल्ली। नोटबंदी के बाद से आम जनता की तकलीफें अभी कम होने का नाम नहीं ले रही हैं, इसके बाद सरकार आम जनता पर एक और इमोशनल अत्याचार करने जा रही है। गैस सब्सिडी के बाद केंद्र सरकार की नजर अब रेल टिकट सब्सिडी पर है।

Suresh Prabhu
 
भारतीय रेलवे की आमदनी बढ़ाने के उद्देश्य से रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने लोगों से रेलवे किराए में मिलने वाली छूट, जैसे- कुछ ट्रेनों में सप्ताहांत में मिलने वाली छूट, आखिरी वक्त में खाली बर्थ पर मिलने वाली छूट, आदि को अपनी मर्जी से छोड़ने की अपील की है। 
 
अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस के मुताबिक, इस संबंध में रेल मंत्री सुरेश प्रभु ने रलवे बोर्ड को 24 नबंवर को एक सूचना जारी की थी। सुत्रों के मुताबिक रेलवे बोर्ड इस योजना को जल्द ही जारी कर सकती है। हालांकि अधिकारियों का कहना है यह काफी मुश्किल लगता है कि लोग उनके किराए में मिलने वाली सब्सिडी छोड़ने को तैयार होंगे।
 
रेलवे लोगों को यह बताने का प्रयास भी करेगा कि वो कितनी सब्सिडी दे रहा है। कुछ समय के लिए अब हर टिकट पर लिखा होगा कि भारतीय रेलवे आपसे कुल लागत का औसतन 57 फीसदी किराया वसूल रहा है। ऐसा करने से लोगों को पता लगेगा कि प्रत्येक टिकट पर 43 फीसदी सब्सिडी दी जा रही है। लोकल ट्रेन में तो मुसाफिर से 36 फीसदी ही किराया लिया जाता है बाकी 67 फीसदी रेलवे खुद खर्च करती है।
 
आपको बता दें कि पेट्रोलियम मंत्रालय के मामले में ग्राहकों के बैंक अकाउंट उनके एलपीजी कनेक्शन से लिंक थे। इसलिए लोगों से घरेलू गैस सब्सिडी छोड़ने की अपील करना आसान था। हालांकि रेलवे के लिए यही प्रक्रिया काम नहीं करेगी इसलिए सरकार फिलहाल सिर्फ ई-टिकट पर एक पायलट प्रोजेक्ट शुरू करने जा रही है। रेलवे यात्रियों को छूट पाने के लिए अपने आधारकार्ड लिंक कराने की प्रक्रिया भी शुरू की जा चुकी है।

Courtesy: National Dastak
 

सरकार के दावों की पोल खोल रहे पार्लियामेंट के खाली एटीएम

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नई दिल्ली। नोटबंदी को आज एक महीना पूरा हो चुका है। 30 दिन के अंतराल में सरकार ने कई तरह के वादे किए। सरकार और खुद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी इसे अपनी रैलियों में सराहते नजर आ रहे हैं। प्रधानमंत्री शायद इस मुद्दे पर किसी भी तरह की क्रॉस क्वश्चनिंग की जरूरत नहीं समझते इसीलिए संसद में जाने से बच रहे हैं। प्रधानमंत्री की मौजूदगी को लेकर विपक्ष हंगामा कर रहा है, जिसके कारण संसद लगातार 17 दिन दिन से बाधित हो रही है। इससे देश का करोड़ों रुपया जाया हो रहा है। आरबीआई गवर्नर और सरकार नोटबंदी से हो रही परेशानी को शीघ्र ही खत्म होने का हवाला दे रहे हैं। वहीं खुद पार्लियामेंट में एटीएम में कैश की उपलब्धता की बातें झूठा साबित हो रही हैं। एटीएम में कैश की उपलब्धता की हकीकत को वरिष्ठ पत्रकार जयशंकर गुप्ता ने एक फेसबुक पोस्ट के जरिए बताने की कोशिश की है। पढ़िए….

ATM
 
हमारे मित्र, वरिष्ठ पत्रकार हरजिंदर साहनी ने अपनी पोस्ट में रिजर्व बैंक के गवर्नर उर्जित पटेल के 90 फीसदी बैंक एटीएम में नकदी होने संबंधी बयान की पड़ताल अपने इलाके के एटीएम्स में नकदी की उपलब्धता से की है। मेरा मानना है कि जब वित्त मंत्री इस तरह की बात बोलते हैं तो रिजर्व बैंक के गवर्नर पीछे क्यों रहें। पता नहीं ये लोग किस दुनिया में रहते हैं। संसद भवन के अधिकतर एटीएम खाली रहते हैं। जब किसी में पैसा आता है, लंबी कतार लग जाती है। 
 
रिजर्व बैंक के चारों ओर एक दो किमी के दायरे में दर्जनों एटीएम हैं, मेरा दावा नहीं अनुभव है कि दो तिहाई या तो बंद रहते हैं या उनमें पैसा नहीं होता। किसी एटीएम में पैसा होने की सूचना मिलते ही लोग दौड़ते भागते वहां पहुंच कर कतारबद्ध हो जाते हैं। बैंकों के अंदर भी नकदी का कमोबेस यही हाल है। अपना पैसा निकालने के लिए घंटों कतार में खड़े रहने और नंबर आ जाने के बाद भी गारंटी नहीं कि पैसा मिल जाएगा। टका सा जवाब मिलता है, कैश समाप्त हो गया है।

हम जहां रहते हैं, पूर्वी दिल्ली के गाजीपुर में, वहां पंजाब नेशनल बैंक की शाखा है, और उसका एटीएम भी। एटीएम प्राय: बंद रहता है। बैंक के दरवाजे के पास सुबह छह बजे से ही 30-40 स्त्री पुरुषों की कतार लग जाती है जो दिन चढ़ने के साथ और लंबी होती जाती है। यह नजारा हमें रोजाना सुबह की सैर के समय देखने को मिलता है। अफसोस है कि अरुण जेटली और उर्जित पटेल को यह सब नहीं दिख रहा। जेटली को जब संसद भवन के एटीएम का हाल नहीं दिखता तो, दिल्ली, एनसीआर और देश के अन्य हिस्सों का हाल कैसे दिखेगा। बहुत व्यस्त रहते हैं। संसद भवन में अपने चहेते पत्रकारों के साथ दुनिया जहान की बातें करने की व्यस्तता उन्हें चंद कदम दूर एटीएम का हाल जानने की फुरसत भी नहीं देती। खुदा खैर करे!
 
नोट बंदी के बाद घर में हजार, पांच सौ के नोटों की शक्ल में जमा गाढ़ी कमाई को सरकारी आदेश निर्देशों के तहत बैंक मे जमा करवाने, पुराने नोट बदलने तथा बैंक में जमा रकम का सरकार द्वारा निर्धारित हिस्सा निकालने के लिए बैंक के सामने लगी लम्बी कतारों में घंटों खड़े रहे और खड़े खड़े ही जान गंवा देनेवाले सत्तर अस्सी लोगों की मौत का जिम्मेदार-गुनहगार कौन है, जवाब में पक्ष-प्रतिपक्ष और इस देश की संसद मौन है।

Courtesy: National Dastak

राजनैतिक दल कर सकते हैं कालाधन सफेद करने का गोरखधंधा, EC ने शुरू की छंटाई

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नई दिल्ली। भारत में रजिस्टर्ड राजनैतिक दल कालेधन को सफेद कर नोटबंदी की हवा निकाल सकते हैं। इस मामले को लेकर केंद्रीय निर्वाचन आयोग सख्त हो गया है। केंद्रीय निर्वाचन आयोग के मुताबिक भारत में रिकॉर्ड 1,900 राजनैतिक दल रजिस्टर्ड हैं। जिनमें से 400 से ज़्यादा ने तो कभी चुनाव लड़ा ही नहीं है। इसलिए मुमकिन है कि इन दलों का इस्तेमाल काले धन को सफेद बनाने के लिए किया जा रहा हो।

राजनैतिक दल कर सकते हैं कालाधन सफेद करने का गोरखधंधा, EC ने शुरू की छंटाई
 
अंग्रेज़ी दैनिक 'टाइम्स ऑफ इंडिया' में प्रकाशित रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्रीय निर्वाचन आयुक्त नसीम ज़ैदी ने बताया है कि दुनियाभर में सबसे ज़्यादा रजिस्टर्ड राजनैतिक दलों वाले देश में काले धन को छिपाने के लिए ऐसी पार्टियों के इस्तेमाल की आशंका को खत्म करने की खातिर चुनाव आयोग ने ऐसी पार्टियों का नाम अपनी सूची से काटने की प्रक्रिया शुरू कर दी है।
 
नसीम ज़ैदी ने कहा, "इन पार्टियों के नाम सूची में से काट दिए जाने पर वे उस आयकर छूट पाने के अयोग्य हो जाएंगी, जो उन्हें राजनैतिक पार्टी होने के नाते मिलती है।"

उन्होंने कहा कि केंद्रीय चुनाव आयोग ने राज्यों के मुख्य निर्वाचन आयुक्तों से कहा गया है कि वे अपने पास रजिस्टर्ड उन सभी राजनैतिक पार्टियों की सूची भेजें, जिन्होंने कभी चुनाव नहीं लड़ा है। राज्य आयोगों से इन पार्टियों द्वारा हासिल किए गए चंदे की जानकारी भी मांगी गई है। समाचारपत्र के मुताबिक, नसीम ज़ैदी ने कहा कि रजिस्टर्ड पार्टियों की इस तरह छंटाई का काम हर साल किया जाएगा।

Courtesy: National Dastak