Home Blog Page 2335

टैक्स चोरी के मामले में बीजेपी नेता की कंपनी पर छापेमारी

0

नई दिल्ली। एक तरफ प्रधानमंत्री मोदी नोटबंदी को कालेधन के खिलाफ लंबी जंग का आगाज बता रहे हैं, वहीं उन्हीं की पार्टी के कई नेता टैक्स चोरी और कालेधन के मामले में फंसते नजर आ रहे हैं। कर्नाटक के बीजेपी नेता जनार्दन रेड्डी की बेटी की खर्चीली शादी के बाद नया मामला मुंबई की बीजेपी यूनिट से सामने आ रहा है। 

बीजेपी की मुंबई यूनिट के उपाध्यक्ष की कंपनी पर एक करोड़ रुपये से अधिक की टैक्स चोरी का मामला सामने आया है। पुणे सर्विस टैक्स डिपार्टमेंट के अधिकारियों ने बीजेपी नेता मिहिर कोटेचा की कंपनी इंटेग्रिटी लॉजिस्टिक सलूशन (आईएलएस) के चांदिवली ऑफिस में छापेमारी की कार्रवाई की है। कोटेचा ने वडाला से विधायक का चुनाव लड़ा था लेकिन वह कांग्रेस नेता कालिदास कोलांबकर से हार गए थे। पार्टी की मुबई यूनिट के उपाध्यक्ष चुने जाने से पहले वह बीजेपी युवा मोर्चा के अध्यक्ष थे।
 
एनबीटी के अनुसार, सर्विस टैक्स डिपार्टमेंट को इस बारे में सूचना मिली थी कि आईएलएस ने अप्रैल 2014 और मार्च 2015 के बीच टैक्स की चोरी है जिसके बाद शुक्रवार को यह छापेमारी की कार्रवाई की गई है। अधिकारियों ने कंपनी की विभिन्न बैलेंस शीट और हार्ड डिस्क की जांच की है। 
 
सर्विस टैक्स डिपार्टमेंट इस बात की भी जांच कर रहा है कि क्या कंपनी ने सर्विस टैक्स बचाने के लिए दो इनवॉइस तैयार की थीं। हमारे सहयोगी अखबार मुंबई मिरर ने इस बारे में संपर्क किया तो कोटेचा ने इस बात को स्वीकार किया है कि उनकी कंपनी पर छापेमारी कर जांच की गई है।
 
उन्होंने कहा, 'टैक्स देने में देर हुई है क्योंकि पुणे के हमारे एक कर्मचारी विजय गोडर ने कंपनी के फंड से बेइमानी से 3 करोड़ रुपये निकाल लिए थे। यह रकम सर्विस टैक्स व अन्य विभागों को टैक्स के रूप में दिए जाने के लिए रखी गई थी। विजय ने कागजों के साथ भी हेराफेरी की थी और हमने उसके खिलाफ पवई पुलिस थाने में मामला दर्ज कराया है।' विजय अभी मामले की हाई कोर्ट की सुनवाई करने तक अंतरिम जमानत पर है। सर्विस टैक्स निरीक्षक अजित लिमये में इस मामले में अधिक जानकारी देने से इनकार कर दिया है।

Courtesy: National Dastak

केंद्र सरकार ईमानदार है तो लोकपाल की नियुक्ति करने से क्यों बच रही है- मायावती

0

नई दिल्ली। बहुजन समाज पार्टी की मुखिया मायावती ने प्रधानमंत्री की रैली के बाद प्रेस कांफ्रेंस कर उनके दावों की पोल खोली। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार द्वारा यूपी चुनावों को देखते हुए और अपनी विफलताओं पर पर्दा डालने के लिए नोटबंदी की। उन्होंने कहा कि इनके पास चुनावों में बताने के लिए कुछ नहीं था इसीलिए हड़बड़ी में नोटबंदी का सहारा लिया। 

Maya Modi

मायावती ने कहा कि केंद्र सरकार अपने ही फैसले को बार बार बदल रही है। वहीं भाजपा शासित राज्यों में तो भारी गड़बड़झाला नजर आ रहा है। सरकार की विफलता के कारण देश की नब्बे प्रतिशत जनता लाइनों में खड़ी है। इनमें गरीब मजदूर और किसान सबसे ज्यादा दुखी हैं। मजदूरी के अभाव में अब लोग पलायन करके वापस अपने गांव की तरफ लौट रहे हैं। लोग मजदूरी छोड़कर बैंकों की लाइनों में लगे हैं। 

ऐसे में बीजेपी नेता और खुद प्रधानमंत्री सहित सारे लोग जनता का ध्यान बांटने के लिए तरह-तरह की नाटकबाजी में लगे हैं। उन्होंने कहा कि बीजेपी रैली में इनके द्वारा लगाए गए आरोप सरासर गलत हैं। 
 
देश के कालेधन का बड़ा हिस्सा धन्नासेठों और पूंजीपतियों के हाथों में है। लेकिन सरकार उन्हें बचाने में लगी है। सरकार इस बात का जवाब क्यों नहीं दे रही कि मेहनतकश और आमजनता को उस अपराध की सजा क्यों दी जा रही है जो उसने किया ही नहीं है। 
भ्रष्टाचार से लड़ने में बीजेपी का रवैया बहुत ही लचीला रहा है। नोटबंदी से कालाधन रोकने का दावा भी लोगों की आंखों में धूल झोंकने वाला ही रहा है। अगर ये ईमानदार होते तो अब तक लोकपाल की नियुक्ति कर दी होती जो कि इन्होंने नहीं की। उन्होंने कहा कि भ्रष्टाचार से लड़ने का इनका रिकॉर्ड नहीं रहा है। 

When Arnab Goswami’s bosses stopped him from hosting ‘mega’ farewell show

0

Times Now’s former editor-in-chief, Arnab Goswami, was not allowed to host a ‘mega’ edition of a four-hour Times Now by the channel’s management, sources have told Janta Ka Reporter.

Arnab was reportedly keen to invite big names of politics, sports and entertainment on his planned ‘farewell’ edition of News Hour, but the channel’s CEO, MK Anand, abruptly told staff on 17 November that the anchor would be presenting his last debate show on 18 November.

Anand also reportedly added that the last episode of News Hour with Arnab will be just like any other debate shows he had presented in the past.

अरनब गोस्वामी
Photo: India Today

One Times Now staff, who was present in the office when Anand made this sudden announcement, said, “We were all taken aback by the announcement. The CEO’s tone body language said it all that the management was in no mood to allow Arnab to have even one show of his choice before he left the channel.”

 

Another Times Now reporter said that the CEO’s public snub for Arnab was conclusive evidence that all wasn’t well with him and his bosses.

Contrary to popular perception, Arnab’s departure has not hurt the ratings of Times Now. The BARC data for the weeks since Arnab’s leaving, Times Now’s has further established its dominance in the English news genre.

This, according to the channel insiders, is because of ‘sane audience’ returning to Times Now fold.

“These sane audience are those who traditionally watched Times Now but had stopped watching because of Arnab and his perceived biases in favour of the BJP,” said the source.

In a sudden move on 1 November, the popular and controversial Times Now anchor had resigned.

He was the Editor-in-Chief and President, News, of Times Now and ET Now.

Courtesy: Janta Ka Reporter

उना में दलितों की पिटाई के मामले में 4 की जमानत मंजूर

0

अहमदाबाद। गुजरात उच्च न्यायालय ने गिर सोमनाथ जिले के उना कस्बे में दलितों को पीटने के मामले में संलिप्तता पर गिरफ्तार दो पुलिसकर्मियों सहित चार आरोपियों की जमानत मंजूर कर ली है।

Una Dalits
 
न्यायाधीश एजे देसाई ने शांतिभाई मनपारा, नितिन कोठारी, उना के निलंबित पुलिस निरीक्षक निर्मलसिंह जाला और उपनिरीक्षक नरेंद्र देव पांडेय को जमानत दी। मनपारा सनातन गौ सेवा ट्रस्ट के न्यासी हैं और कोठारी ट्रस्ट से जुड़े हैं और उन्हेांने दलितों की से पिटाई की थी।
 
दलीलों के दौरान मनपारा और कोठारी के वकील विराट पोपट ने दलील दी कि दोनों को जमानत दी जानी चाहिए। इस मामले में जांच पूरी हो चुकी है और आरोपपत्र सितंबर में दायर किया गया था।
 
राज्य सरकार ने चारों आरोपियों की जमानत याचिका का विरोध किया और कहा कि उनके द्वारा किए गए अपराध गंभीर प्रकृति के हैं। गुजरात सरकार ने यह भी दलील दी कि अगर आरोपियों को जमानत दी गई तो वे पीडि़तों को धमका सकते हैं।
 
गौरतलब है कि उना में चार दलित युवकों ने गोरक्षा के नाम पर बेरहमी से पीटा था। इतना ही नहीं इन्हें थाने के सामने भी पीटा गया। इस मुद्दे को मायावती द्वारा राज्यसभा में उठाया गया था। इस घटना ने गुजरात सहित देशभर में दलित आंदोलन का दौर शुरू किया।

Courtesy: National Dastak