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रविश जी का सन्देश इस देश युवाओं के लिए – ज़रूर सुने

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रविश जी का सन्देश इस देश युवाओं के लिए – ज़रूर सुने

बैंकों में कैश खत्म, पब्लिक गुस्से में, पूरा शहर जाम, मोदी के पुतले फूंके

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अलीगढ़। बैंकों में कैश खत्म होने पर लोग कितने दिन सब्र रखें। सब्र का बांध आज आखिरकार टूट ही गया। सैकड़ों लोग सड़क पर आ गए। शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर पुतले फूंके। पूरे शहर को जाम कर दिया। पुलिस जाम नहीं खुलवा पा रही है। याद रहे कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने आठ नवम्बर की रात 12 बजे से 500 और 1000 रुपये के नोट पर पाबंदी लगा दी थी। तभी से बैंको के सामने लंबी लाइन लगी हुई है। लोगों को जरूरत के हिसाब से पैसा नहीं मिल पा रहा है।

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मोदी के खिलाफ नारेपैसे की किल्लत से जूझ रहे लोग बैंकों में पहुंचे। बैंकों में बताया गया कि पैसे नहीं हैं। एटीएम भी खाली हैं। इस पर लोगों का गुस्सा फूट पड़ा। उन्होंने शहर के सभी प्रमुख चौराहों पर जाम कर दिया। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के खिलाफ नारेबाजी की। उन पर जनता को परेशान करने का आरोप लगाया।

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ये चौराहे और मार्ग किए जाम अलीगढ़ शहर के अब्दुल्ला चौराहा, दोदपुर, सिविल लाइंस, जीवनगढ़, रामघाट रोड, कठपुला जाम कर दिया। शहर में कहीं जाना है तो इन चौराहों और मार्गों पर आना ही होता है। हाल यह है कि एक किलोमीटर का सफर एक घंटे में तय हो पा रहा है। जहां पुतले फूंके गए हैं, वे सब मुस्लिमबहुल इलाके हैं

 

आभार: जागरण

मोदी भक्ति: आज तक की एंकर अंजना ओम कश्यप ने अपना पूरा नाम बोला ‘अंजना ओम मोदी’, वीडियो वायरल

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आजतक की एंकर अंजना ओम कश्यप ने अपना नाम लगभग अंजना ओम मोदी बोल दिया जिसके बाद सोशल मीडिया पर ये वीडियो वायरल हो गया है।

अपने शो हल्ला बोल में अपने परिचय के दौरान ज़ुबान फिसलने का ये वीडियो ट्विटर और फेसबुक पर गैर-भाजपा के लोगों द्वारा खूब शेयर हो रहा है।

अंजना ओम कश्यप

नीचे दिए गए वीडियो में आप देख सकते हैं किस तरह अंजना कह रहीं हैं, ” नमस्कार, आप देख रहे हैं हल्ला बोल आपके साथ मैं हूं अंजना ओम मोदी..हममम अंजना ओम कश्यप”

जैसे ही ये वीडियो शेयर हुआ सोशल मीडिया यूजर्स ने कहा,  ये मोदी भक्ति का नतीजा है।

ट्विटर यूर्जस ने ट्वीट करते हुए कहा, जैसे काम करते हुए आपके बॉस का नाम दिमाग में घूम रहा हो।

यूजर रोशन राय पहले थे जिन्होंने सबसे पहले इस बारे में ट्वीट किया।

यहां देखिए ट्विटर और फेसबुक यूजर्स के कुछ रिएक्शन

 
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पढ़िए कुछ फेसबुक कमेंट-

ए पी सिंह चट्ठा: एक समय था जब आजतक की साख शीर्ष पर थी, लेकिन अब इन्होंने खुद को भाजपा के लिए खुद को बेच दिया।

जोस यूसुफ: क्षमा करें … ये उसकी गलती नहीं है। आजकल भारतीय इसी तरह बात करते हैं… केवल भक्ति और ना कोई तर्क।

राकेश चतुर्वेदी: पहले हर कोई आजतक पर भरोसा करता था है, लेकिन अब चैनल देख कर बदलना पसंद करता  है।

अजय सिंघल: वो आजतक में  एक ऐसी है जो निष्पक्ष है,यह जुबान का फिसलना हो सकता है।

मन्ना बरभुया: अंजना ओम मोदी .. बुरा नहीं वास्तव में

सोम्याकान्ता मिश्रा: इसे कहा दाता है मोदी मैनिया… हा हा हा …

Courtesy: Janta Ka Reporter
 

भाजपा के ख़िलाफ़ आर्टिकल लिखने पर पत्रकार को कोर्ट ने दी 6 महीने की सजा

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आज के भारत की इस नई लहर में भाजपा के खिलाफ कुछ भी लिखना मना है वरना आपको सजा हो सकती हैं। ऐसा ही कुछ हुआ वरिष्ठ पत्रकार गौरी लंकेश के साथ, गौरी लंकेश ने 23 जनवरी 2008 को भाजपा पर एक आर्टिकल लिखा था।

जिसके बाद कर्नाटक के धारवाड़ जिले के सांसद प्रह्लाद जोशी और भारतीय जनता पार्टी के नेता उमेश दुशी ने मानहानि का मामला दर्ज करा दिया था।

मानहानि के इन दोनो मामलों में गौरी को अदालत ने छ महीने की सजा और दस हज़ार रूपये का जुर्माना लगाया है।लेकिन अदालत ने गौरी लंकेश को उच्च अदालत में अपील करने की अनुमति देते हुए जमानत भी दे दी है।

भाजपा

 

उमेश दुशी के अधिवक्‍ता संजीव के मुताबिक़ उनके मामले में पहला अभियुक्त देवानंद जगपुर और गौरी लंकेश दूसरी अभियुक्त थी।

लेकिन अदालत ने गौरी लंकेश को दोषी ठहराया और देवानंद को बरी कर दिया था। अदालत ने कहा कि गौरी अपने बचाव में पूरे सुबूत नहीं पेश कर सकी।

प्रह्लाद जोशी की याचिका में सिर्फ़ गौरी लंकेश को ही आरोपी बनाया था | प्रह्लाद जोशी के अधिवक्ता एसएम लक्ष्मीश्‍वर ने बताया कि अदालत ने इस आर्टिकल को आधारहीन मानते हुए गौरी लंकेश को छह माह की कैद और पांच हजार रुपये के जुर्माने की सजा सुनाई है।

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए गौरी ने कहा, “अदालत का फैसला मेरे लिए एक अस्थायी झटका है, लेकिन मैं उच्च अदालत में चुनौती दूंगी। कई लोगों को लगा कि मैं जेल जाउंगी। लेकिन मैंने उन्हें जमानत पाकर निराश किया है।

Courtesy: Janta Ka Reporter
 

आपके पुराने नोटों से बन रहे है प्लाईवुड, अब घरों में लागई नोटों वाले दरवाजे

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नई दिल्ली। नोटबंदी के फैसले के बाद बैन हो चुके 500 और 1000 रुपये के पुराने नोटों को बैंक में जमा करवाने के लिए बैंको के बाहर लोगों की जमकर भीड़ लगी हुई है। लेकिन क्या आर जानते है कि जिन पुराने नोटों को बैंक में जमा करा रहे हैं, उनका क्या होता है? अगर कोई आपसे बोले की जो नोट आप जमा करवा रहे हैं उनका प्रयोग प्लाईवुड बनाने में किया जाता है तो आपकी सोच क्या होगी?

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जी हां, ईटी की खबर के अनुसार पुराने नोटों को देश के कई हिस्सों में स्थित आरबीआई के सेंटरों में भेजे जाते हैं। वहां मशीन से इनके टुकड़े-टुकड़े किए जाते हैं। उसके बाद इन्हें बोरी में भरकर री-साइक्लिंग या ईंट बनाने के लिए कुछ डीलरों के पास भेजा जाता है। इन नोटों को केरल के कन्‍नूर जिले में वालापट्टनम नदी के किनारे स्थित वेस्टर्न इंडिया प्लाईवुड (डब्ल्यूआईपीएल) के यार्ड में भी पहुंचाया जा रहा है, जहां इनसे पल्प बनाया जाएगा।
 
तैयार किया जाता है पल्प 
इस मामले पर डब्ल्यूआईपीएल के मैनेजिंग डायरेक्टर पीकेएम मोहम्मद ने बताया, 'हमें पिछले तीन हफ्तों में 500 और 1,000 रुपये के 140 टन के नोट मिले हैं।' प्लाईवुड, हार्ड बोर्ड्स और लेमिनेट्स बनाने वाली 70 साल पुरानी कंपनी को 8 नवंबर को नोटबंदी के ऐलान से कुछ दिनों पहले आरबीआई ने खुद चुना था।
 
मोहम्मद ने बताया, 'रिजर्व बैंक ने पहले ट्रायल बेसिस पर हमें 10-15 बैग नोट दिए थे, जिससे हमने पल्प तैयार किया। हमारा काम देखने के बाद आरबीआई ने नोटों का बड़ा कंसाइनमेंट भेजने का वादा किया, तब हमें पता नहीं था कि आगे क्या होने वाला है।' रिजर्व बैंक डब्ल्यूपीआईएल को ऐसे अधिक नोट देना चाहता है, लेकिन कंपनी हफ्ते में 40 टन नोट ही ले रही है। इसके साथ ही एक टन नोट के लिए कंपनी सेंट्रल बैंक को 250 रुपये चुकाती है।
 
बनाते हैं कई प्रॉडक्ट्स
बता दें कि डब्ल्यूआईपीएल के पास स्वीडन में बनी हाई एनर्जी पल्पिंग प्रेस है। कंपनी इनकी मदद से मिनटों में पल्प से वुड चिप्स और दूसरे री-साइकल्ड प्रॉडक्ट्स बनाती है। मोहम्मद ने बताया, 'हमारे करंसी नोट टॉप क्वॉलिटी पेपर से बने होते हैं। इसे न्यूजप्रिंट या क्राफ्ट पेपर कंपनियों के नॉर्मल प्रोसेस से री-साइकल नहीं किया जा सकता।'
 
 
लंबे वक्त तक चलते हैं इस तरह के प्रॉडक्ट्स
बता दें कि डब्ल्यूआईपीएल में नोटों के टुकड़ों को वुड चिप्स के साथ मिलाया जाता है और उसके बाद उसे प्रेस में डाला जाता है। 100 किलो के पल्प को प्रेस करने में सात किलो नोट का इस्तेमाल होता है, बाकी वुड टिप्स होते हैं। कंपनी के यार्ड में नोटों की बोरियां लगातार आ रही हैं, लेकिन डब्ल्यूआईपीएल इस रेशियो को आगे भी मेंटेन रखेगी।
 
मोहम्मद ने बताया, 'हमारे पल्प की फाइबर डेंसिटी पर बुरा असर ना हो, इसलिए हमने रेशियो को मेंटेन रखने का फैसला किया है। हम इस पल्प की मदद से लंबे समय तक चलने वाले कई प्रॉडक्ट्स बनाते हैं।' कुछ दशक पहले तक दुनिया भर के सेंट्रल बैंक पुराने नोटों को जलाते थे। हालांकि, पर्यावरण को लेकर चिंता बढ़ने के बाद उन्होंने ऐसा करना बंद कर दिया।

Courtesy: National Dastak