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मोदी की कुशीनगर रैली में कुर्सियों की तोड़फोड़, फिर लौटेगा पिंजरे में रैली का दौर?

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को यूपी के कुशीनगर में रैली की। पीएम की इस रैली को बसपा सुप्रीमो मायावती ने फ्लॉप बताया है। पीएम मोदी के जाते ही इस रैली में गुजरात और पंजाब में अमित शाह की रैली की तरह अफरा तफरी का माहौल दिखाई दिया। 

Modi Rally

भास्कर की रिपोर्ट के अनुसार, नरेंद्र मोदी रविवार को परिवर्तन यात्रा को एड्रेस करने पहुंचे। अपने स्‍पीच के बाद जैसे ही मोदी ने मंच छोड़ा, रैली में आए लोगों ने मंच पर धावा बोल दिया। ये सभी लोग मंच पर पड़ी मोदी की माला को लूटने पहुंचे थे। साथ ही कई लोग स्‍टेज पर लगे सजावट के फूलों को भी तोड़ने में लगे थे। इस दौरान कई लोगों के बीच झड़प भी हुई। वहीं, स्‍टेज के पास रखी कुर्सियां भी तोड़ दी गईं। इस दौरान कई लोगों के बीच झड़प भी हुई, जिसकी वजह से अफरा-तफरी का माहौल बन गया।

दरअसल अमित शाह ने सितंबर में गुजरात में रैली की थी। लेकिन लोगों के गुस्से के कारण इस रैली के लिए पिंजरेनुमा मंच तैयार किया गया। यहां पाटीदार समुदाय के लोगों के गुस्से से बचने के लिए बीजेपी को इस तरह की कवायद करनी पड़ी थी। क्योंकि इससे पहले एक रैली में तोड़फोड़ हो चुकी थी। इसके साथ ही बाद में बीजेपी की रैलियों में कुर्सियों को एक दूसरे से बांधा जाने लगा। 
 
गौरतलब है कि नोटबंदी के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की नजर में जनता बहुत खुश है। शायद इसी उम्मीद में यहां कुर्सियों को बांधा नहीं गया था। जिसका खामियाजा यहां के आयोजकों को भुगतना पड़ा। पीएम के जाते ही लोग उनकी माला पर झपट पड़े। साथ ही झड़प में कुर्सियों को भी जमकर तोड़ा गया।

Courtesy: National Dastak

 

अडाणी की कंपनियों को दिए गए कर्ज का खुलासा करने से केंद्रीय सूचना आयोग ने किया इनकार

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केंद्रीय सूचना आयोग (सीआईसी) ने कहा है कि उद्योगपति गौतम अडाणी द्वारा प्रवर्तित कंपनियों को दिए गए कर्ज से जुड़े रिकॉर्ड का खुलासा नहीं किया जा सकता है क्योंकि भारतीय स्टेट बैंक ने संबंधित सूचनाओं को अमानत के तौर पर रखा है और इसमें वाणिज्यिक भरोसा जुड़ा है।

रमेश रणछोड़दास जोशी की याचिका पर आयोग ने यह आदेश दिया। जोशी यह जानना चाहते थे कि गौतम अडाणी समूह को किस आधार पर बड़ी मात्रा में कर्ज दिए गए. उन्होंने इस बारे में साक्ष्य भी मांगे थे कि क्या कर्ज ऑस्ट्रेलिया में कोयला खानों से संबंधित था।

अडाणी

 

सूचना आयुक्त मंजुला पराशर ने आदेश में कहा, “सीपीआईओ अपीलकर्ता को सूचित करता है कि मांगी गई सूचना वाणिज्यिक सूचना है और तीसरे पक्ष के भरोसे के आधार पर इसे रखा हुआ है।

इसीलिए इसे उपलब्ध नहीं कराया जा सकता है और आरटीआई कानून की धारा आठ (1) (डी) (वाणिज्यिक विश्वास) और (ई) (अमानत के तौर पर पड़ी चीज संबंधी प्रावधान) के तहत सूचना देने से इनकार किया जाता है।”

भाषा की खबर के अनुसार, भारतीय स्टेट बैंक के केंद्रीय जन-सूचना अधिकारी (सीपीआईओ) ने दावा किया कि जोशी ने अपने आरटीआई आवेदन में यह जिक्र नहीं किया कि यह मामला बड़े जन हित का है।

आरटीआई कानून के तहत वैसी सूचना जिसे खुलासे से छूट प्राप्त है, उसका खुलासा किया जा सकता है बशर्ते उसमें कोई बड़े पैमाने पर जनहित जुड़ा हो।

Courtesy: Janta Ka Reporter
 

नोटबंदी के खिलाफ RSS नेता ने संघ से नाता तोड़कर CPI(M) से मिलाया हाथ

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राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के बड़े नेता पी पद्मकुमार ने संघ से अपने चार दशक पुराने सम्बधों को खत्म करते हुए CPI (M) से हाथ मिला लिया है। बताया जा रहा है कि वह केंद्र की बीजेपी सरकार के नोटबंदी फैसले से नाराज थे। इन दिनों पद्मकुमार संगठन के हिंदू एक्या वेदी में सचिव पद पर कार्य कर रहे थे।

RSS

 

केरल में संघ और अल्पसंख्यक वर्ग पर हिंसा की खबरें बहुतायात देखने को मिलती है। मीडिया रिर्पोटस् के अनुसार अपने चार दशक पुराने रिश्तों को संघ परिवार से तोड़ने के मुख्य कारणों में पी पद्मकुमार ने माना कि राजनैतिक हिंसा और बीजेपी व संघ के नोटबंदी के अमानवीय स्टैंड को लेकर उन्होंने मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी से जुड़ने का मन बनाया। रविवार को पी पद्मकुमार ने CPI (M) से के साथ औपचारिक अपने सम्बधों का खुलासा कर दिया।

इस पर मार्क्सवादी कम्यूनिस्ट पार्टी के जिला सचिव ने संघ से बाहर आने के कारणों पर बात करते हुए मीडिया को बताया कि,” बीजेपी और संघ के इस अमानवीय स्टैंड के चलते कितने परिवार अनाथ हो गए। संघ के राजनितिक हिंसा को लेकर अमानवीय रवैए और 1000 और 500 रुपए के नोट बंदी को फैसले के विरोध स्वरूप संघ परिवार से बाहर आने का निर्णय लिया।

Courtesy: Janta Ka Reporter

 

पेटीएम उतना ही भारतीय जितना जापान की मारुति सुजुकी

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नई दिल्ली। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा नोटबंदी की घोषणा के बाद सबसे ज्यादा फायदा जिन कंपनियों को होता है दिख रहा है उनमें मोबाइल भुगतान की सुविधा देने वाली अग्रणी कंपनी पेटीएम सबसे आगे है। लेकिन बढ़ते मुनाफे के साथ ही कंपनी में चीन के निवेश को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। आरएसएस से जुड़े स्वेदशी जागरण मंच ने कहा है कि वह अब पेटीएम और चाइनीज ऑनलाइन रिटेल कंपनी अलीबाबा ग्रुप के रिश्तों की 'स्टडी' करेगा। 

Paytm

आपको बता दें कि आरएसएस से जुड़ा स्वेदशी जागरण मंच चीनी उत्पाद और निवेश के खिलाफ लंबे समय से आंदोलन चला रहा है। स्वदेशी जागरण मंच ने कहा है कि वो पेटीएम और चीनी कंपनी अलीबाबा ग्रुप के बीच के संबंधों का अध्ययन कर रहा है।

स्वदेशी जागरण मंच के सह-संयोजक अश्विनी महाजन ने इकनॉमिक्स टाइम्स अखबार से कहा, “हमने पेटीएम में चीनी हिस्सेदारी के बारे में कई रिपोर्ट पढ़ी है। अब हम नकद-मुक्त अर्थव्यवस्था की तरफ बढ़ रहे हैं तो हमें ये ध्यान रखना होगा कि भारतीयों का डाटा सुरक्षित रहे। किसी भी भारतीय कंपनी को किसी विदेशी कंपनी के साथ डाटा शेयर नहीं करना चाहिए। विदेशी निवेश को पूरी तरह पारदर्शी होनी चाहिए।” 

आठ नवंबर को जब पीएम मोदी ने नोटबंदी की घोषणा की उसके बाद पेटीएम ने सभी प्रमुख अखबारों में पीएम मोदी की तस्वीर के साथ बड़े विज्ञापन छपवाए थे। जिसके बाद से इस कंपनी के चीनी स्वामित्व का मुद्दा चर्चा में है। अखबार के अनुसार अलीबाबा के ग्लोबल मैनेजिंग डायरेक्टर के गुरु गौरप्पन को पिछले महीने पेटीएम के बोर्ड में एडिशनल डायरेक्टर के तौर पर शामिल किया गया था। 
 
माना जाता है कि अलीबाबा और उसकी सहयोगी कंपनी अलीपे की नोएडा स्थित पेटीएम में 40 प्रतिशत से अधिक हिस्सेदारी है और अलीबाबा ग्रुप पेटीएम के माध्यम से भारतीय बाजार में पैर जमाना चाहता है। महाजन ने बताया कि एसजेएम के विशेषज्ञ पेटीएम का विशेष अध्ययन कर रहे हैं और संगठन की दिल्ली में होने वाली अगली बैठक में इस मुद्दे पर चर्चा होगी। महाजन के अनुसार अध्ययन के नतीजे आ जाने के बाद वो इस मुद्दे पर केंद्र सरकार से संपर्क करेंगे।
 
वहीं चीन की हिस्सेदारी को लेकर आलोचनाओं से घिरे पेटीएम के संस्थापक एवं मुख्य कार्यकारी अधिकारी विजय शेखर शर्मा ने कहा कि उनकी कंपनी उतनी ही भारतीय है जितनी मारुति। शर्मा ने कहा, “हम मारुति जितने ही भारतीय हैं। हम हर तरह से भारतीय हैं। कभी सरकार के नियंत्रण वाली मारुति की बड़ी हिस्सेदारी जापानी कार कंपनी सुजुकी मोटर कार्प के पास है। सुजुकी के पास मारुति की 56.21 प्रतिशत हिस्सेदारी है और यह इसकी एकमात्र प्रवर्तक है।”
 
गौरतलब है कि आरएसएस की आर्थिक इकाई स्वदेशी जागरण मंच ने हाल में कुरुक्षेत्र में हुए अपने सम्मेलन में चाइनीज सामानों के खिलाफ अगले साल जनवरी से एक साल का कैंपेन चलाने का फैसला किया है।

Courtesy: National Dastak