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सफाई कर्मचारी की अपील- विजय माल्या की तरह मेरा भी कर्ज माफ कर दो सरकार

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नई दिल्ली। केंद्र के पुराने नोट बंद करने के फैसले को लेकर लोगों में काफी गुस्सा है। लेकिन वहीं सार्वजनिक क्षेत्र के बैंक एसबीआई द्वारा कथित तौर पर विजय माल्या के किंगफिशर एयरलाइंस के कर्ज समेत कुल 7000 करोड़ रुपए का कर्ज माफ कर देने पर नासिक के एक सफाई कर्मचारी ने अपने कर्ज को माफ करने के लिए बैंक को पत्र लिखा है।


 
आपको बता दें कि नासिक के एक सफाई कर्मचारी ने एसबीआई को पत्र लिखकर उसका भी 1.5 लाख रुपए का कर्ज माफ करने की मांग की है। महाराष्ट्र के नासिक जिले के यंबकेश्वर नगर परिषद में सफाई कर्मचारी भाउच्च्राव सोनावने ने बताया कि उन्होंने एसबीआई से उनका कर्ज ‘‘उसी तर्ज पर माफ करने की मांग की है जिस तरह बैंक ने माल्या का कर्ज माफ किया है।’’

सोनावने ने बताया, ‘‘मैंने बैंक को पत्र लिखा और माल्या का कर्ज माफ करने के उसके ‘अच्छे फैसले’ के लिए बधाई दी है। मैंने एसबीआई से मेरा ऋण भी माफ करने का अनुरोध किया है।’’ उन्होंने बताया कि यह कर्ज उन्होंने बेटे की बीमारी के इलाज के लिए लिया था और अभी तक बैंक प्रबंधक ने उनके पत्र का जवाब नहीं दिया है।
 
बहरहाल, वित्त मंत्री अरूण जेटली ने सरकार के नोटबंदी अभियान पर सदन में चर्चा के दौरान कहा था कि माल्या का लोन माफ नहीं किया गया बल्कि लोन राइट ऑफ किया गया है। उन्होंने कहा कि कर्ज तो अभी भी बना हुआ है जिसे वसूलने की कोशिश जारी रहेगी।
 
 
वित्त मंत्री ने बताया राइट ऑफ का मतलब
वित्त मंत्री ने बताया था कि राइट ऑफ का ये मतलब नहीं है कि लोन माफ कर दिया गया है। राइट ऑफ करने का मतलब सिर्फ इतना होता है कि बैंक ने अकाउंटिंग बुक में लोन को नॉन परफॉर्मिंग एसेट्स यानी एनपीए मान लिया गया है. राइट ऑफ करने को लोन की माफी ना समझा जाए।

बता दें कि विपक्ष ने केंद्र सरकार पर आरोप लगाए थे कि वो जनता को तो नोटबंदी से परेशान कर रही है जबकि कारोबारियों का लोन माफ कर रही है। कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी ने कहा था कि मोदी सरकार के नोटबंदी के फैसले के चलते लोग लाइनों में लगे हैं, वहीं ललित मोदी, विजय माल्या जैसे लोन डिफॉल्टर आजाद घूम रहे हैं।

Courtesy: National Dastak
 

स्याही के निशान मिटाने के तरीके गूगल पर खोज रहे लोग

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नई दिल्ली। केंद्र के पुराने नोट बंद करने के फैसले से लोगों को खासी दिक्कते हो रही हैं। सरकार ने पुराने नोट बदलने के लिए लोगों को 50 दिन का समय दिया है तो वहीं साल 2017 में पुराने नोटों को आरबीआई की ब्रांच में जाकर बदल सकते हैं। आपको बता दें कि नोटबंदी के फैसले के बाद आ रही दिक्कतों से बचने के लिए लोग नए-नए तरीके खोजने में जुट गए हैं।

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पहले कई लोग अपने पैसे बदलवाने के लिए एक दिन में कई-कई बार बैंक जा रहे थे। इसके बाद सरकार ने एक ही व्यक्ति द्वारा पुरानी करेंसी को कई बार एक्सचेंज करने पर रोकने के लिए बैंकों को स्याही लगाने का आदेश दिया था। लेकिन स्हायी लग जाने के बाद कई दिनों तक अपने पैसे बदलवाने के लिए बैंक नहीं जा सकते थे। लेकिन इसी के चलते लोगों ने स्याही हटाने का तरीका भी ढूंढना शुरू कर दिया। 
 

आपको बता दें कि सरकार के नोट बदलवाने पर स्याही लगाने के फैसले के एक दिन बाद ही गूगल पर बड़ी संख्या में ‘Indelible Ink Removal’ को सर्च किया गया। दरअसल सरकार ने स्याही लगाने का फैसला 15 नवंबर को लिया था, और इसी दिन से ‘Indelible Ink Removal’ गूगल ट्रेंड्स में दिखने लगा। गूगल ट्रेंड्स डेटा के मुताबिक, ‘Indelible Ink removal’ सर्च में बढ़ोतरी 15 नवंबर से ही देखी गई। 
 
वहीं इसके एक दिन बाद इसे और भी ज्यादा सर्च किया गया। Google के डेटा के अनुसार, मुंबई और दिल्ली इन तरीकों को सर्च करने में लगभग बराबर रहे जबकि उसके बाद बेंगलुरु के लोगों ने सबसे ज्यादा इन तरीकों को सर्च किया।
 
क्यों लिया था स्याही लगाने का फैसला
बता दें कि वित्त सचिव शक्तिकांत दास ने मंगलवार (15 नवंबर) को एलान किया था कि नोट बदलवाने पर स्याही का निशान लगाया जाएगा। यह निशान ठीक वैसा होगा जैसा वोट देने पर लगता है। शक्तिकांत दास ने कहा कि अगर एक ही आदमी बार-बार आएगा तो दूसरों को दिक्कत होगी, इसलिए इस नियम को लाया गया है।
 
शक्तिकांत दास ने एक प्रेस कॉन्फ्रेंस में कहा था, “बैंकों और एटीएम के आगे लगी लंबी लाइनों की जांच में पाया गया है कि कुछ लोग बार-बार पैसे बदलने आ रहे हैं। यह भी रिपोर्ट मिली है कि कई लोगों ने अपने कालेधन को सफेद में बदलने के लिए कुछ लोगों से सांठ-गांठ की और उन्हें पैसे बदलने के लिए कई-कई बार बैंक भेजा जा रहा है।”

Courtesy: National Dastak
 

नोटबंदी: लगभग 60 लोगों की मौत, लेकिन फिर भी पीएम मोदी के लिए ये लोगों के दुख का मज़ाक बनाने का मौका

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जब से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 500 रुपये और 1,000 रुपये के नोट बंदी की घोषणा कर दी है, पीएम मोदी पर जनता के लाखों लोगों का मजाक बनाने का आरोप लगता रहा है।

नोटबंदी की घोषणा के कुछ घंटों बाद वो तीन दिन के लिए जापान के लिए रवाना हो गए, मोदी ने उन लोगों के दुख का मज़ाक उड़ाया जिनके घरों में शादी होनी थी और मोदी की नोटबंदी की घोषणा के बाद वो परेशानियां सह रहे थे।

फिर गोवा में उन्होंने कतार में खड़े लोगों को घोटाले में शामिल होने वाला बताया, हालांकि उनके समर्थकों ने बाद में स्पष्ट किया है वो उपहास के रुप में कांग्रेस उपाध्यक्ष राहुल गांधी के लिए कहा गया था।

शनिवार को पीएम ने ग्लोबल सिटिजन फेस्टिवल टेलिकॉन्फ्रेंसिंग के जरिए संबोधिन में आम नागरिकों को 100 रुपये के लिए होने वाली परेशानी का मज़ाक उड़ाया।

अपने भाषण के संबोधन में पीएम मोदी ने कहा, ‘आप लोगों ने मुझे सिर्फ भाषण देने के लिए बुलाकर समझदारी दिखाई है गाना गाने को न कहकर आपने अच्छा किया नहीं तो आप लोग निश्चित तौर पर अपने पैसे वापस मांग लेते वो भी 100 रुपये के नोटों में।’

लेकिन पत्रकार और सोशल मीडिया यूजर्स  पीएम मोदी द्वारा उड़ाए गए इस बात से बेखबर नही रहे।

 

जनता का रिपोर्टर के सौजन्य से.

जांच में खुलासा: जेएनयू के लापता छात्र नजीब पर एबीवीपी कार्यकर्ता ने किया था हमला

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जेएनयू के प्रॉक्टर की जांच में एबीवीपी कार्यकर्ता विक्रांत कुमार विश्वविद्यालय परिसर में हुए एक हंगामे के दौरान नजीब अहमद पर हमला करने के दोषी पाए गए हैं।

इस घटना के बाद नजीब एक महीने से भी अधिक समय से लापता है। उत्तर प्रदेश के बदायूं का रहने वाला नजीब (27) जेएनयू में स्कूल ऑफ बायोटेक्नोलॉजी का छात्र है और वह विश्वविद्यालय परिसर में विक्रांत सहित एबीवीपी के कार्यकर्ताओं के साथ हुई कथित हाथापाई के एक दिन बाद यानी 15 अक्तूबर से लापता है। जेएनयू ने घंटना के संबंध में प्रॉक्टर की निगरानी में जांच के आदेश दिए थे।

एक आधिकारिक आदेश के अनुसार, ‘प्रॉक्टर की जांच में विक्रांत कुमार 14 अक्तूबर को आक्रामक व्यवहार के साथ अपमानजनक शब्दों का प्रयोग करते हुए नजीब अहमद पर हमला करते पाए गए। यह अनुशासनहीनता और दुराचार है।’ विक्रांत से यह पूछा गया है कि आखिर क्यों उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं करनी चाहिए।

बहरहाल, एबीवीपी ने विक्रांत का समर्थन करते हुए विश्वविद्यालय प्रशासन पर जांच के दौरान ‘पक्षपात’ करने का आरोप लगाया।

एबीवीपी सदस्य और जेएनयूएसयू के पूर्व सदस्य सौरभ शर्मा ने कहा, ‘इस मामले में प्रॉक्टर ने उन छात्रों के बयान लिए हैं जो वहां मौजूद ही नहीं थे। ना केवल यह जांच पक्षपातपूर्ण है बल्कि प्रशासन ने वाम बहुल छात्रसंघ का साथ दिया है।’