Home Blog Page 2365

देशभक्ति ताक पर रखकर चीन से मंगाए जाएंगे एटीएम के नट-पुर्जे

0

नई दिल्ली। देश में 500 और 1000 के नोट बंद हो चुके हैं। 10 दिन से भी ज्यादा हो गए हैं लेकिन अभी भी लोग बैंकों के बाहर लाइन लगाकर पैसे के लिए अपनी बारी का इंतजार कर रहे हैं। जहां एक तरफ 500 और 1000 के नोट एटीएम से निकल नहीं रहे वहीं नए चले 2000 के नोट भी एटीएम सपोर्ट नहीं कर रहे हैं।

ATM india

देश में जहां 2 लाख दो हजार एटीएम मशीनें हैं वहीं सिर्फ 22,500 एटीएम ही काम कर रहे हैं। सरकार ने बिना तैयारी के नोटबंदी कर दी जिससे आम जनता को खासी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।

आधिकारिक सूत्रों से खबर है कि जो भी एटीएम मशीन काम नहीं कर रहे हैं उनके पार्ट्स अब चीन से मंगाए जाएंगे। बता दें कि जारी किए गए नए नोटों को स्वीकार्य करने के लिेए एटीएम में लगने वाले मैगनेटिक कंपोनेंट और हार्डवेयर की कमी की वजह से नोट निकलने में दिक्कतें आ रही हैं। अधिकारियों का कहना है कि एक बार अगर यह पार्ट एटीएम में लग जाए तो एटीएम एक हफ्ते में सुचारू रूप से चलने लगेंगे।
 
यहां सवाल यह उठता है कि दीवाली पर सरकार के कई नेताओं की तरफ से लोगों से चाईनीज समानों को ना खरीदने की अपील की गई थी। तो वहीं सरकार की तरफ से अब एटीएम को चालू करने के लिए सामान चीन से मंगाए जाएंगे।
 
हालांकि स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की चेयरपर्सन अरुंधती भट्टाचार्य का कहना है कि सारे एटीएम में इन पार्टों की जरूरत नहीं है। उन्होंने कहा कि एटीएम की पर्याप्त मात्रा में आपूर्ति की जा रही है, आने वाले दिनों में इस तरह की कोई समस्या नहीं होगी। वहीं वित्त मंत्रालय के एक सीनियर अधिकारी ने कहा कि यह एक बड़ी समस्या नहीं है और स्थिति जल्द ही सामान्य हो जाएगी।

Courtesy: National Dastak

नोटबंदी का असर: महाराष्ट्र लोकल चुनाव में लोगों ने की बीजेपी पर सर्जिकल स्ट्राइक – सभी सीटों पर हार

0

मुंबई। काले धन पर शिकंजा कसने के उद्देश्य से केंद्र सरकार द्वारा 8 नवंबर को 500 और 1000 के नोटों पर बैन लगा दिया गया। इसके बाद देशभर में अफरातफरी का माहौल है। लोग लाइन में लगे हुए हैं। विपक्षी पार्टियां भी सरकार को घेर रही हैं। सरकार नोटबंदी को लेकर दस महीने की तैयारी बता रही है। लेकिन नोटों की कमी इस दावे की पोल खोल रही है। बहुत सारे लोग नोटबंदी की भेंट चढ़ चुके हैं। ऐसे में लोगों की पहली प्रतिक्रिया भी आ गई है। 

NOTEBAN

नोटबंदी के बाद महाराष्ट्र के लोकल चुनाव में बीजेपी को बड़ा झटका लगा है। दरअसल, बीजेपी पार्टी महाराष्ट्र के एक लोकल एग्रिकल्चरल बॉडी के चुनावों में बुरा तरह से हार गई है। पार्टी को महाराष्ट्र में एग्रिकल्चरल प्रोड्यूस मार्केट कमेटी में 17 सीटों पर पीजेन्ट्स एंड वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया (पीडब्ल्यूडी), शिवसेना, कांग्रेस और एनसीपी एलायंस और भाजपा में से सदस्यों के चुनाव की प्रक्रिया में भाजपा को एक भी सीट पर पर जीत नहीं मिली है। 
 
दरअसल, इस चुनाव में सबसे अधिक 15 सीटों पीजेन्ट्स एंड वर्कर्स पार्टी ऑफ इंडिया ने जीती हैं। वहीं दूसरी ओर, शिवसेना और कांग्रेस ने एक-एक सीट पर जीत हासिल की है, लेकिन भाजपा को एक भी सीट नहीं मिली। बता दें कि इस चुनाव में कांग्रेस ने 25 साल बाद एपीएमसी पोल में एक सीट जीतने में सफलता हासिल कर ली है। इन चुनावों में हुई जीत का उत्सव मनाते समय स्थिति तब खराब हो गई, जब पीडब्ल्यूडी और कांग्रेस समर्थकों ने कुर्सियां और पत्थर फेंकने शुरू कर दिए। इस दौरान बीजेपी का एक कार्यकर्ता घायल भी हुआ है।
 
काले धन पर लगाम लगाने के चलते महाराष्ट्र में सामान्य जीवन पर काफी बुरा असर पड़ा है। नोटबंदी के फैसले से रिटेल और खुदरा व्यापारी भी बेहद परेशान हैं। पूरे महाराष्ट्र में बहुत से किसान और मजदूरों को भी इस फैसले की वजह से दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है। बाजारों में सन्नाटा है। लोग राशन के बजाय बैंकों की लाइन में लगे हैं।

Courtesy: National Dastak

नोट से भी ज्यादा तेजी से बदल रहे हैं बैंकों के नियम

0

नई दिल्ली। देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर की रात को 500 और 1000 के नोट बंद करने का अचानक ऐलान कर दिया था। जिसके बाद देश में भूचाल आया हुआ है। लोग सुबह से रात तक बैंकों के सामने लाईन में लगकर पैसे निकालने की कोशिश कर रहे हैं और ज्यादातर लोगों को पैसे नहीं मिल पा रहे हैं। पैसे न होने की वजह से कहीं लोग भूखों मर रहे हैं तो कहीं बैंकों के सामने ही लोगों की मौत हो रही है।

Note ban

ताज्जुब की बात है कि 10 दिन होने के बाद भी सरकार पैसे निकालने और जमा करने की राशि नहीं निर्धारित कर पा रही है। आज कुछ और नियम होते हैं तो कल कुछ और। नोटबंदी के बाद सरकार ने 4000 पुराने नोट बदलने की राशि निर्धारित की थी लेकिन बाद में इसे बढ़ाकर 4500 कर दिया गया वहीं अब सरकार ने एक और निर्दयतापूर्वक फैसला लेते हुए इस राशि को घटाकर 2000 कर दिया। 
 
इसके अलावा सरकार ने हफ्ते में 20,000 रुपए तक पैसे निकासी की सीमा निर्धारित की थी जिसे बढ़ाकर 24,000 किया गया लेकिन फिर से सरकार ने इस राशि को घटाकर 20,000 कर दिया। वहीं एटीएम से सरकार ने पहले 2000 रुपए पैसे निकालने की बात कही थी बाद में इस राशि को बढ़ाकर 2500 कर दिया गया था जिसे अब फिर से 2000 ही निर्धारित कर दिया। सरकार निर्धारित ही नहीं कर पा रही है उसे क्या करना है?

सरकार ने नोटबंदी के फैसले कर दिए लेकिन न तो एटीएम मशीनें सही हैं न ही बैंकों में काम सही तरीके से हो रहा है। जनता भूख से तड़प रही है और रोज सुबह-सुबह आर्थिक सचिव आते हैं एक प्रेस कॉंफ्रेंस करते हैं और नोट बदलने और निकालने के नए नियम बता जाते हैं। सरकार को शायद यह नहीं पता कि जनता तो पहले से इतनी परेशान है और इस तरह रोज रोज नियमों में बदलाव करने से जनता और कंफ्यूज हो रही है। 

आपको बता दें कि नोटबंदी के फैसले के बाद देशभर में लगभग 40 लोगों की मौतें हो चुकी हैं। कहीं लोग बैंकों की लाईन में मर गए तो कहीं अस्पताल में नोट न लेने से मर गए।

Courtesy: National Dastak

 

बीजेपी के सहकारी मंत्री की गाड़ी से 92 लाख की अवैध नकदी बरामद

0

पिछले एक हफ्ते में नोटबंदी की घोषणा के बाद से अवैध रूप से जमा नकदी पकड़े जाने के कई मामले सामने आए है। इसी कड़ी में महाराष्ट्र के शोलापुर से 92 लाख की नकदी एक प्राइवेट गाड़ी से बरामद की गई है। ये नकदी और गाड़ी वहीं के लोक मंगल समूह की बताई गई हैं। लोक मंगल समूह के संचालक राज्य के वरिष्ठ बीजेपी नेता और सहकारी मंत्री सुभाष देशमुख है।

Black Money
Representation Image

उस्मानाबाद के कलेक्टर प्रशांत नरनवारे ने बताया कि गुरूवार को नगर परिषद चुनावों के मद्देनज़र फ्लाइंग स्काउड द्वारा रूटिन जांच-पड़ताल की जा रही थी। उसी में एक वाहन की चैकिंग में के दौरान 92 लाख की नकदी सामने आई। ये गाड़ी लोकमंगल समूह की है। नकदी के साथ गाड़ी में मौजूद व्यक्ति लोकमंगल समूह का ही कर्मचारी था।

 

टाइम्स आॅफ इंडिया की खबर के अनुसार, इस बाबत सहकारी मंत्री सुभाष देशमुख ने बताया कि ये पैसा चीनी मिल श्रमिकों के भुगतान हेतु था। ये मिल लोक मंगल समूह से ही जुड़ी हुई है।

जबकि इस पर कलेक्टर प्रशांत नरनवारे ने कहा कि हमनें वाहन और नकदी को उस्मानाबाद जिले की उमरगा तहसील में ही जब्त कर लिया था और नकदी को स्थानीय सरकारी कोष में जमा करा दिया गया है। इसके अलावा हमनें लोक मंगल समूह से इस पर स्पष्टीकरण मांगा है व आयकर विभाग व पुलिस को इस बारें में सुचित कर दिया गया है।

यदी लोक मंगल समूह नकदी के बारें मेें सही-सही ब्यौरा उपलब्ध कराता है तो ये वापस कर दिया जाएगा वर्ना कानूनी प्रावधानों के अनुसार इस पर कार्रवाई होगी।

Courtesy: Janta Ka Reporter
 

Demonetisation effect: Maharashtra stamp duty collection drops 37 per cent

0

Stamp duty collection in Maharashtra has dropped by 37 per cent after the Centre demonetised high-value notes, a senior official said on Friday.

Demonetisation effect
File Photo

The Union government’s decision to demonetise Rs 500 and Rs 1,000 notes was announced 10 days back and stamp duty collection is already down by 37 per cent across the state, Inspector General of Registration (IGR) and Controller of Stamps N Ramaswamy told PTI.

 

The state government’s average daily earning through property registration charges and stamp duty has come down to Rs 42 crore from Rs 65 crore earlier, he said.

“Though most of the transactions such as calculation of ready reckoner, its stamp duty and payment are done digitally as well as through demand drafts, still the collection has gone down.

“The IGR offices across the state generally handle 7,300 documents daily, which has now plunged to 4,000 documents,” he said.

The IGR office registers all types of property deals, including sale and purchase of land, properties, rent and lease agreements. It is the second largest revenue generating department of the state government, after excise.

The IGR office contributed Rs 21,767 crore to the state coffers in 2015-16 financial year.

“There is one fee called document handling fee, where Rs 20 per page is charged from the people who are buying it.

People generally pay the amount in cash at the IGR office. In post demonetisation period, I have issued a circular that the amount can be paid through demand draft. Still, the response is low,” said the IAS officer.

Industry sources said a sizeable section of the total cost of a property is paid in cash and it never reflects on papers.

Such deals are badly hit after the government’s demonetisation move.

(With inputs from PTI)

Courtesy: Janta ka Reporter
 

7 Deadly Days of Demonetisation

0

The Common man continues to suffer; will Modi Government hear their pleas?

As the 8th day of demonetisation approaches, death toll rises to 47 while millions go hungry. Serious questions were raised in the Parliament Winter Session, on both, its execution as well as the consequences. The impact of the so-called demonetisation measure of the BJP government is proving to be much grimmer than anticipated. The economy is slowly grinding to a halt, with the poor and daily wage earners being particularly badly hit.

Prabhat Patnaik and a host of others have talked about the futility of these measures, which seeks to focus on the flow of black money, while black money is actually unaccounted or black wealth. This black wealth is stashed in dollar accounts abroad, or in land, gold, jewellery, etc. Demonetisation has very little impact on this black wealth. Govind Acharya, the former RSS ideologue has estimated that even by most optimistic account, demonetisation of the existing Rs. 500 and Rs. 1,000 notes will interdict only 3% of this black wealth.The Modi government’s move, while equally ineffective in countering “black money”, has the added flaw of impinging severely on common people. 

Courtesy: NewsClick