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गुजरातियों के पास सबसे ज्यादा ब्लैकमनी! गूगल पर ढूंढ रहे सफेद करने के तरीके

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नई दिल्ली। 8 नवंबर की रात जैसे ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने देश में 500-1000 रुपये के नोटों को गैरकानूनी करने का ऐलान किया पूरा देश इस ऐलान से हैरान रह गया। लेकिन इन सबके बीच जो सबसे दिलचस्प डेटा सामने आ रहा है वह आपको और भी हैरानी में डाल सकता है। पुराने 500 और 1000 हजार के नोट बंद होने का असर गूगल सर्च पर भी दिख रहा है। अब तक जहां गूगल सर्चिंग में जिओ सिम का बोलबाला दिख रहा था, तो बीती रात के बाद से यहां पर ब्लैक मनी ने जगह ले ली है। 

Black Money

गूगल पर अब लोग ब्लैक मनी सर्च कर रहे हैं। जैसे ही गूगल पर How to Black लिखा जाता है, सबसे पहला रिजल्ट 'how to convert black money to white' का आ रहा है। इससे ये भी पता चलता है कि लोगों के पास ब्लैक मनी है और वे उसे कैसे भी व्हाइट में कनवर्ट करना चाहते हैं।
 

 
लेकिन आपको जानकर आश्चर्य होगा कि जिन पीएम मोदी ने कालाधन को खत्म करने के लिए नोटों को बैन किया है उनका गृह राज्य गुजरात इसमें पहले नम्बर पर है। इसके बाद बीजेपी शासित राज्यों महाराष्ट्र और हरियाणा का ही नम्बर आता है।
 
महाराष्ट्र में देश की वित्तीय राजधानी मुम्बई है और हरियाणा पिछले काफी समय से रियल एस्टेट डील के चलते मशहूर रहा है। इतना ही नहीं शहरों की बात करें तो नोएडा पहले नम्बर पर आता है। उसके बाद गुरुग्राम और फिर मुम्बई का नम्बर आता है।
 
बता दें कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 9 नवंबर की रात बड़ा ऐलान करते हुए कहा था कि 10 नवंबर से पुराने 500 और 1000 रुपए के नोट नहीं चलेंगे। गवर्नमेंट ने इसकी जगह नए 500 रुपए के नोट के साथ पहली बार 2000 रुपए का नोट भी निकाला है।
 
एक दिन पहले तक देश में लोग जिओ की बातें कर रहे थे। इतना ही नहीं गूगल पर How to लिखने पर 'how to get jio sim' सर्च में सबसे पहले आता था। ऐसे में अब यहां पर Black Money से रिलेटेड रिजल्ट सर्च हो रहे हैं।

Courtesy: National Dastak

ढाई साल पहले नोट बदलने के खिलाफ थी बीजेपी, गरीबों के बरबाद होने का दिया था वास्ता

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नई दिल्ली। 8 नवम्बर 2016 की तारीख को पीएम मोदी ने एकाएक 500 और 1000 के नोट बंद कर दिया। उन्होंने ये भी नहीं सोचा कि इतने बड़े फैसले से देश की जनता का क्या हाल होगा। लेकिन 23 जनवरी 2014 एक ऐसी तारीख है जब ज़ी न्यूज में एक खबर छपी थी जिसमें बीजेपी ने तत्कालीन यूपीए सरकार के नोट बदलने के फैसले पर सवाल खड़े कर दिए थे। बीजेपी ने इसे चुनावी स्टंट बताते हुए गरीबों और मजदूरों के बरबाद होने की बात कही थी। लेकिन अब जब यूपी चुनाव का वक्त नजदीक आ गया है तो क्या बीजेपी ने अचानक ऐसा करके चुनावी स्टंट किया है? 

Modi jaitley

बता दें कि 23 जनवरी 2014 को ज़ी न्यूज में एक खबर प्रकाशित हुई थी जिसमें बीजेपी की प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने यूपीए सरकार के बड़े करेंसी नोटों के वापस लेने के फैसले का खुला विरोध किया था। तब बीजेपी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी जोर-शोर से अपने प्रचार में जुटे हुए थे। उसी समय यूपीए की सरकार ने 2005 से पहले के करेंसी नोटों को वापस लेने का निर्णय किया था लेकिन विपक्ष में बैठी एनडीए ने उसका पूरी तरह से विरोध किया था।

 

 
भाजपा ने आरोप लगाया था कि सरकार ने कालेधन पर काबू पाने के नाम पर वर्ष 2005 से पहले के सभी करेंसी नोट वापस लेने का जो निर्णय किया है वह आम आदमी को परेशान करने और उन चहेतों को बचाने के लिए है जिनका भारत के कुल सकल घरेलू उत्पाद के बराबर का कालाधन विदेशी बैंकों में जमा है। भाजपा ने कहा था कि यह निर्णय दूर दूराज के इलाकों में रहने वाले उन गरीब लोगों की खून पसीने की गाढ़ी कमाई को मुश्किल में डाल देगा जिसे उन्होंने जरूरत के वक्त के लिए जमा किया है।

भाजपा प्रवक्ता मीनाक्षी लेखी ने कहा था सरकार का यह फैसला विदेशी बैंकों में अमेरिकी डालर, जर्मन ड्यूश मार्क और फ्रांसिसी फ्रांक आदि करेंसियों के रूप में जमा भारतीयों के कालेधन में से एक पाई भी वापस नहीं ला सकेगा। सरकार का विदेशों में जमा भारतीयों के कालेधन को वापस लाने का कोई इरादा नहीं है और वह केवल चुनावी स्टंट कर रही है।
 
लेखी ने तर्क दिया था कि इस निर्णय से दूर दराज के इलाकों के गरीबों की मेहनत की कमाई पर पानी फिर जाने का पूरा खतरा पैदा हो जाएगा। उन्होंने कहा था कि गरीब और आदिवासी लोग पाई-पाई जमा करके अपनी बेटियों की शादी ब्याह और अन्य वक्त जरूरत के लिए घर के आटे-दाल के डिब्बों आदि में धन छिपा कर रखते हैं। ऐसे में अधिकतर लोग अपना धन 2005 के बाद की करेंसी से नहीं बदल पाएंगे या बिचौलियों के भारी शोषण का शिकार हो जाएंगे।
 
भाजपा नेता ने कहा था कि देश की बहुत बड़ी आबादी ऐसी होगी जिसे इस खबर का पता भी नहीं होगा और वक्त जरूरत के लिए जब वे अपना यह कीमती धन खर्च करने के लिए निकालेंगे तब उन्हें एहसास होगा कि उनकी कड़ी मेहनत की कमाई कागज का टुकड़ा भर रह गई है। सरकार की कड़ी आलोचना करते हुए उन्होंने कहा था कि यह निर्णय आम आदमी और आम औरत को परेशान करने तथा उन चहेतों को बचाने के लिए है जिनका भारत के कुल सकल घरेलू उत्पाद के बराबर का कालाधन विदेशी बैंकों में जमा है।

Courtesy: National Dastak
 
 

जमीन बेच जमा किए थे 54 लाख, नोट बैन के सदमे में किया सुसाइड – अमर उजाला

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मोदी सरकार द्वारा 500 और 1000 के नोट पर बैन लगाने के बाद हैदराबाद में दर्दनाक हादसा सामने आया। हैदराबाद के महबूबाबाद में एक महिला ने हाल ही में 12 एकड़ की जमीन बेच कर करीब 54 लाख रुपये जमा किए थे। लेकिन बैन की खबर लगने के बाद वह गहरे सदमे में आ गई और सुसाइड का कदम उठा लिया।

women suicide
 
बताया जा रहा है कि महिला को किसी ने जानकारी दी थी कि अब यह पैसे किसी काम के नहीं हैं। मीडिया खबरों के अनुसार महिला ने पैसे अपनी बेटी की शादी के लिए जमा किए थे और उसने हाल ही में इन रुपयों में से एक लाख रुपये पति के इलाज के लिए खर्च किए थे। 

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