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केजरीवाल ने Paytm मुखिया के अहंकरी रवैये पर PM मोदी से मांगा जवाब

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दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने Paytm के मुखिया विजय शेखर की एनुअल पार्टी में अंहकारी रवैये वाला वीडियो वायरल होने पर ट्वीट कर इस कृत्य को शर्मनाक बताया। उन्होेंने कहा कि मोदी जी देश को बताए कि वह आम नागरिकों की कीमत पर किस प्रकार से इस कम्पनी को सर्पोट कर सकते हैं?

अरविंद केजरीवाल

Paytm 2017 एनुअल पार्टी का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था जिसमें विजय शेखर झूमते हुए चिल्ला-चिल्ला कह रहे है कि ये है Paytm, जो हमारे साथ नहीं है वो रोएगें

एक साल में वो किया जो उन्होंने 10 साल में नहीं किया

कैसे नहीं होगा?

2017 हमारा होगा, कलेजा दिया, जान दी, खून दिया, सारा कुछ लगा दिया

ब…….?

हमने कुछ सोचा,

और साला दूसरों की पेंट गीली नहीं हुई तो क्या सोचा

अब कोई इंडिया में हमारी तरफ नहीं देख रहा, क्यों?

हमारे को सारा देश नहीं, सारी दुनिया देख रही है

 

नोटबंदी के बाद देश की अर्थव्यवस्था में जहां एक और मंदी के आसार देखें गए और बेरोजगारी व कई तरह की परेशानियो से देश रूबरू होता रहा वहीं दूसरी और पेटीएम ने सीईओ विजय शेखर ने पिछले दिनों Paytm 2017 एनुअल पार्टी में अपनी कामयाबी का जश्न मनाते समय जोश में होश खोते हुए विवादित बयान दिए थे।

आपको बता दे कि जनता का रिपोटर्र पर प्रकाशित खबर का संज्ञान लेते हुए उन्होंने इसकी कड़ी निंदा की। इससे पूर्व दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने पीएम मोदी से सवाल किया था कि किस अधिकार के साथ पेटीएम मुखिया ने नोटबंदी के फौरन बाद ही पूरे पेज का विज्ञापन सभी प्रमुख समाचार पत्रों में दिया था।

 

इस पर दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि कि ई-काॅमर्स कंपनी Paytm के साथ हुए गुप्त समझौते का क्या रहस्य है? उन्होंने ट्वीट कर आरोप लगाया कि प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद Paytm को सर्वाधिक लाभ मिला, घोषणा के बाद अखबारों के फ्रंटपेज पर पेटीएम कम्पनी प्रधानमंत्री मोदी का धन्यवाद करती नज़र आ रही है। इसके पीछे क्या डील है।

Courtesy: Janta Ka Reporter
 

बीजेपी मुख्यालय में भाजपाइयों ने लगाए अमित शाह मुर्दाबाद के नारे

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नई दिल्ली। उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव से पहले भाजपा में बगावत शुरु हो गई हैं। भाजपा ने उम्मीदवारों की जो लिस्ट जारी की है उसमें “बाहरी” लोगों को शामिल किए जाने से नाराज यूपी बीजेपी कार्यकर्ताओं ने विरोध प्रदर्शन किया। भाजपा कार्यकर्ता बुधवार को अशोका रोड स्थित बीजेपी मुख्यालय पहुंचे। जहां गुस्साए कार्यकर्ताओं ने ना सिर्फ पोस्टर लहराए बल्कि भाजपा के वरिष्ठ नेताओं समेत अमित शाह के खिलाफ नारेबाजी भी की।

Amit Shah
 
इस दौरान कुछ कार्यकर्ता पार्टी ऑफिस के अंदर प्रदर्शन कर रहे थे, वहीं अधिकतर लोग बाहर से नारेबाजी कर रहे थे। नारेबाजी में 'अमित शाह मुर्दाबाद, बाहरी लोगों को टिकट देना बंद करो, पुराने कार्यकर्ताओं की इज्जत करो' जैसे नारे लगाए गए। वहीं भाजपाइयों ने कई बैनर भी लहराए जिनपर लिखा था, 'सर्वे के नाम पर झूठ बोलना बंद करो और बाहरी लोगों का सम्मान, वहीं अपने कार्यकर्ताओं का अपमान बंद करो।'
 
दरअसल इन कार्यकर्ताओं की नाराजगी केंद्रीय मंत्री महेश शर्मा से थी, जोकि यूपी के नोएडा से भाजपा सांसद हैं। भाजपाइयों ने एक बैनर पर लिखा था, 'महेश शर्मा को अनैतिक तरीके से पार्टी पर कब्जा बंद करना चाहिए।' इसके अलावा उत्तर प्रदेश चुनावों के लिए यूपी के बीजेपी प्रभारी ओम माथुर के खिलाफ भी नारेबाजी की गई। कार्यकर्ताओं का आरोप है कि पार्टी ने उनका इस्तेमाल रैलियों में भीड़ जुटाने के लिए किया, लेकिन प्रत्याशियों को चुनते हुए उन्हें भुला दिया गया।

आपको बता दें कि भाजपा में बाहरी लोगों को शामिल किए जाने के खिलाफ यूपी में कई जगह पार्टी के खिलाफ प्रदर्शन हुआ। कई जगहों पर पार्टी का झंडा और सीनियर लीडर्स के पुतले जलाए गए हैं। वहीं, भाजपा नेता यह कहते हुए पल्ला झाड़ रहे है कि चुनाव आने पर ऐसी घटनाएं आम होती हैं। उनका कहना है कि भाजपा ने दूसरी पार्टी के उन नेताओं को शामिल किया है जो अपने क्षेत्र में दबदबा रखते हैं।

Courtesy: National Dastak
 

केंद्रीय मंत्री को चुनाव से पहले याद आया अन्य पिछडे वर्ग का आरक्षण

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नई दिल्ली। केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा को पांच राज्यों में चुनाव के आते ही अन्य पिछड़े वर्ग की याद आई है। उपेंद्र कुशवाहा ने अन्य पिछड़ा वर्ग के  वोटरों को लुभाने के लिए पांसा फेंकना शुरु कर दिया है। दिल्ली में एक कार्यक्रम के दौरान उन्होंने कहा कि नवोदय विद्यालयों में अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों के लिए आरक्षण न होना चिंता का विषय है।


 
देश के जवाहर नयोदय विद्यालयों में अन्य पिछड़ा वर्ग के छात्रों को आरक्षण के लिए आरक्षण नहीं है।। उन्होंने कहा कि "नवोदय विद्यालय में अन्य पिछड़ा वर्ग का आरक्षण नहीं होना विसंगति है। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि आने वाले समय में सरकार इस मुद्दे को संज्ञान में लेगी।"
 
राज्य मंत्री ने कहा कि देश में 600 जवाहर नवोदय विद्यालय हैं। लेकिन किसी भी विद्यालय में आरक्षण लागू नहीं है। उपेंद्र कुशवाहा ने का मानना है "जवाहर नवोदय विद्यालयों में ओबीसी के संबंध में आरक्षण के प्रावधानों को लागू नहीं किया गया, ये खुद मुझे अच्छा नहीं लगता है।" 
केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री ने ये बातें राष्ट्रीय सांस्कृतिक एकता सम्मलेन के दौरान कहीं। उनके मुताबिक "मंत्रालय, हमारे मंत्री और हम सभी का ध्यान इस दिशा में गया है। उन्होंने लोगों को विश्वास दिलाया कि आने वाले समय में इस समस्या को हल किया जाएगा।"
 
प्रकाश जावड़ेकर ने कहा "जवाहर नवोदय विद्यालयों में प्रवेश प्रतियोगिता परीक्षाओं के जरिए दिया जाता है, और इस साल करीब 22 लाख बच्चों ने प्रतियोगी परीक्षा में भाग लिया था जिनमें 40,000 को चुना गया। प्रकाश जावड़ेकर ने आगे कहा कि नवोदय विद्यालयों में अनुसूचित जाति के बच्चों के लिए भी आरक्षण का कम प्रावधान है लेकिन 25 फीसद बच्चे एससी कैटेगरी से आते हैं।" 
 
केंद्रीय मानव संसाधन विकास राज्य मंत्री उपेंद्र कुशवाहा राष्ट्रीय लोक समता पार्टी के नेता हैं जो केंद्र में राजग सरकार में सहयोगी हैं. उनका बयान ऐसे समय में आया है जब उत्तर प्रदेश समेत पांच राज्यों में अगले महीने चुनाव होना है।

Courtesy: National Dastak
 

 

Dissenting Students Denied FTII Scholarships: Crackdown

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The four ‘disqualified’ students are also among the 35 students undergoing trial at a Pune court on charges related to the agitation and gheraoing.

FTII
Image: Indian Express

In a clear move to crack down on students of the Film and Television Institute of India (FTII), who staged a four-month-long strike to protest against the appointment of Gajendra Chauhan as the head of the institute, the administration has started refusing scholarships and the opportunity to participate in foreign exchange programmes to those who have “disciplinary matters” pending for their involvement in the protests reports The Indian Express. (http://indianexpress.com/article/education/to-enforce-discipline-no-scholarships-foreign-visit-nod-for-ftii-students-who-participated-in-agitation-4480868/)

As per the file notings obtained by The Indian Express, FTII Director Bhupendra Kainthola has directed the heads of departments (HODs) and Deans to route all files pertaining to scholarships and foreign exchanges through the office of the Proctor, who is in charge of maintaining discipline. Documents obtained by The Indian Express, under the Right to Information Act, from various FTII departments showed that the nomination of eight students, who have “disciplinary matters” pending against them, came under the scanner.

Of these, four students were involved in gheraoing then FTII Director Prashant Pathrabhe in August 2015, at the height of the agitation against Chauhan’s appointment.

The four ‘disqualified’ students are also among the 35 students, including some who have since completed their course in FTII, undergoing trial at a Pune court on charges related to the agitation and gheraoing. Files pertaining to four other students eligible for scholarships showed that FTII had denied release of funds, as three of them were accused of “consuming alcohol and creating disturbance”, while another student was accused of ‘talking disrespectfully to and shouting at the Proctor’. Incidentally, the scholarship of the fourth student was cleared after he submitted a written apology.

However, not everyone fully supported the stance taken by Kainthola. Amit Tyagi, Dean (Films), said on September 22, 2016: “Issues of discipline are minor infringements… and should not prejudice our assessment of students who are basically talented. Hence, scholarships should be awarded to students. However, the final decision is with the director.”

Kainthola told The Indian Express, “It’s true that scholarships have been held back, but only in cases of serious indiscipline or when the inquiry is incomplete. It is equally true that scholarships have been released for students who have apologised in writing and promised good behaviour.”