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गांधी की वजह से खादी की दुर्गति, अभी नोटों से भी हटेंगे गांधी- भाजपा नेता

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नई दिल्ली। भारतीय जनता पार्टी के कुछ मंत्री व नेता अक्सर विवादों में बने रहने के लिए जाने जाते रहे हैं। खादी ग्रामोद्योग के सलाना कैलेंडर पर महात्मा गांधी की जगह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की फोटो पर विवाद गहराता जा रहा है। इस मामले पर हरियाणा के बीजेपी मंत्री अनिल विज ने भाजपा की मंशा को जाहिर कर दिया है। विज का एक बयान सामने आया है। अनिल विज ने कहा है कि गांधी का नाम जुड़ने से खादी की दुर्गति हुई है। विज ने कहा कि अब धीरे-धीरे नोटों से भी गांधी हटेंगे। 

Anil Vij
 
गौरतलब है कि खादी ग्रामोद्योग की ओर से जारी किए जाने वाले सालाना कैलेंडर पर हर साल राष्ट्रपिता महात्मा गांधी की तस्वीर छपती रही है। लेकिन, इस बार कैलेंडर और डायरी से उनकी तस्वीर गायब है और उसकी जगह पीएम नरेंद्र मोदी के फोटो ने ले ली है। इससे पहले गांधी जी की चरखा चलाने की तस्वीर ही छपती थी। इस तस्वीर के बाद से सोशल मीडिया पर लोग पीएम मोदी विरोध कर रहे हैं।  
 
इस मुद्दे पर पीएम मोदी की आलोचना के बाद बीजेपी सफाई दे रही है कि गांधी को कोई रिप्लेस नहीं कर सकता, लेकिन अब खट्टर सरकार में मंत्री अनिल विज ने कहा है कि गांधी का नाम जुड़ने से खादी डूब गई। विज ने कहा कि मोदी ने खादी को बढ़ावा दिया है। विज ने आगे कहा कि गांधी सिर्फ खादी से ही नहीं बल्कि अब नोटों से भी हटेंगे। विज का ये बयान खुद बीजेपी और मोदी सरकार को असहज कर सकता है। विज ने कहा कि मोदी ज्यादा बड़े ब्रांड हैं। उनके नाम से खादी की बिक्री में 14% का इजाफा हुआ है।
 
विज कहा है कि गांधी का नाम जुड़ने से खादी डूब गई है। मोदी उनसे बेहतर ब्रांड हैं इसलिए गांधी की बजाय मोदी का फोटो लगाना खादी के लिए ज्यादा अच्छा है। गांधी की तस्वीर तो नोटों पर है जिससे रुपये की डिवैल्यूएशन हो गई है। जब विज से पूछा गया कि सरकार ने नए नोटों पर गांधी को क्यों रखा है इस पर विज ने कहा कि वो भी हट जाएंगे धीरे-धीरे।

Courtesy: National Dastak
 

Rs 1 crore illegal arms racket in communally sensitive Muzaffarnagar

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Rs 1 crore illegal arms racket in communally sensitive Muzaffarnagar cracked by police ahead of Uttar Pradesh Assembly polls.

illegal arms racket in communally sensitive Muzaffarnagar

The move comes after 453 pistols worth Rs 1 crore were seized from Khurgan and Dabhedi villages in Shamli district on Thursday, they said.

A case was registered against seven persons namely Motiram, Sarvar, Furkan, Khurshid, Aleem, Gayyur and Sarvar in the incident, SP Ajaypal Sharma said.

While Motiram was arrested, six others are absconding, police said, adding that the stringent National Security Act will also be slapped on the accused.

In another incident, police busted an arms manufacturing unit and seized nine pistols at Kakra village here yesterday.

SHO S C Rathore said that one Sardar was arrested in the case but his accomplice managed to escape.

In a district as communally sensitive as Muzaffarnagar, which has witnessed, in the 2013 riots over 62 deaths, 92 injuries and the displacement of approximately 50,000, possession and circulation of arms illegally is all the more dangerous.

In addition to the 2013 riots, Muzaffarnagar also experienced various other communal tensions in 2016 over issues like cow slaughter, rape of a 5 year old and an inter-religion relationship of a young boy and girl.

Courtesy: Janta Ka Reporter

क्रांतिकारी विचारों के धनी प्रो. जयराम प्रसाद सिंह को श्रद्धांजलि

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नई दिल्ली। शोषित पत्रिका के 49 वर्ष तक संपादक रहे प्रो. जयराम प्रसाद सिंह का 13 जनवरी को निधन हो गया। प्रो. सिंह कैंसर से पीड़ित थे। वे पटना के आईजीआईएमएस में भर्ती थे। क्रांतिकारी विचारों के धनी प्रो. जयराम प्रसाद सिंह को लोग सोशल मीडिया पर श्रद्धांजलि अर्पित कर रहे हैं। इतिहासकार डॉ. राजेंद्र प्रसाद सिंह ने लिखा है….

Jairam Prasad Singh
 
प्रो. जयराम प्रसाद सिंह के निधन की खबर ने अंदर तक हिला दिया । वे शोषित – क्रांति के प्रतीक जगदेव प्रसाद के सबसे करीब थे। 25 अगस्त, 1967 को जगदेव प्रसाद ने शोषित दल का गठन किया था। तब से प्रो. जयराम प्रसाद सिंह पूरे 50 साल इसी दल में रहे और इसी दल में दिवंगत भी हो गए। यह एक मिसाल है – एक दल से जुड़ना, जिंदगी भर दल के सिद्धांतों के लिए संघर्ष करना और दल में ही रहकर मर जाना। 
 
शोषित दल की एक पत्रिका है – शोषित। शोषित पत्रिका के संपादक थे प्रो. जयरामप्रसाद सिंह। शोषितों की यह पत्रिका 1968 से प्रकाशित होती है। आश्चर्यजनक किंतु सत्य है प्रो. जयराम प्रसाद सिंह ने पूरे 49 वर्षों तक इस पत्रिका का संपादन किया। पत्रिका भी ऐसी कि वह समाज के सभी शोषितों, वंचितों एवं पीड़ितों के पक्ष में आवाज बुलंद करती थी। प्रो. जयराम प्रसाद सिंह को मैं कोई 25 सालों से जानता हूँ, मगर इतने सालों में उन्हें गाँव- गाँव, गली- गली शोषितों के बीच अलख जगाने के सिवाय कुछ भी करते नहीं देखा है।

Courtesy: National Dastak
 

डिजिटल इंडिया की बात करने वाली सरकार ने अर्धसैनिक बलों के लिए सोशल मीडिया बैन, स्मार्टफोन पर भी लगी रोक

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नोएडा, डिजिटल इंडिया की बात करने वाली मोदी सरकार सेना के जवानों द्वारा उनके ऊपर हो रहे अत्याचार के वीडियो वायरल होने से बैकपुट पर आ गयी है। एक के बाद एक वायरल हो रहे शिकायत वाले वीडियो से सरकार हिल गई और गृह मंत्रालय ने अर्धसैनिक बलों के जवानों के सोशल मीडिया पर वीडियो और निजी तस्वीरें डालने पर रोक लगा दी। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेना की कई यूनिट में भी स्मार्टफोन पर रोक लगा दी गई है।

Smartphone ban for Army

दरअसल जवानों को सोशल मीडिया जवानों द्वारा आवाज उठाने से घबराई सरकार ने सोशल मीडिया के इस्तेमाल में रोक लगाने के लिए गृह मंत्रालय ने आदेश जारी किया है। ताकि सरकार की किरकिरी ना हो सके। गृह मंत्रालय ने कहा है कि अर्धसैनिक बलों के जवानों को सोशल मीडिया इस्तेमाल करने से पहले डीजी से इजाजत लेनी होगी।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, सेना में भी कई यूनिट्स में स्मार्ट फोन पर पाबंदी लगा दी गई है। सरकार ने कहा है कि जवानों को इसका कड़ाई से पालन करना होगा। इस आदेश के बाद जवान तस्वीरें खींचकर ट्विटर, फेसबुक, व्हाट्सएप्प, यूट्यूब या इंस्टाग्राम पर नहीं डाल सकते। हालांकि यह नियम पहले से था कि ड्यूटी के समय आप मोबाइल का इस्तेमाल नहीं कर सकते। अब इस नियम के तहत ड्यूटी और ड्यूटी के बाद भी सेना के जवान स्मार्टफोन का इस्तेमाल नहीं कर सकते हैं। इस फैसले को कड़ाई के साथ लागू किया जाएगा।

बता दें कि पिछले कई दिनों से सेना की जवानों ने सोशल मीडिया पर वीडियो जारी कर अधिकारियों और सुविधाओं को लेकर शिकायत की है। इनमें सबसे पहले बीएसएफ के जवान तेज बहादुर ने खराब खाना मिलने, सीआरपीएफ के जवान जीत सिंह ने सुविधाएं न मिलने, एसएसबी के एक जवान ने अधिकारियों पर तेल और राशन बेचने और सेना के जवान युग प्रताप सिंह ने घरों में अफसरों की तरफ से निजी कार्य कराने जैसे आरोप लगाए हैं। जवानों द्वारा आवाज उठाने से सेना द्वारा पकिस्तान के ऊपर की गयी सर्जिकल स्ट्राइक का ढिंढोरा पीटने वाली मोदी सरकार बैकपुट पर आ गयी है।

Courtesy: Dainik Aaj