पत्रकार सत्येंद्र मुरली के दावे पर बात करने को तैयार नहीं DD

नई दिल्ली। प्रधानमंत्री के 8 नवंबर की रात ''राष्ट्र के नाम संबोधन'' का दूरदर्शन के पत्रकार सत्येंद्र मुरली ने पर्दाफाश किया। इसके बारे में पत्रकार ने प्रेस क्लब में प्रेस कांफ्रेंस कर आरोप लगाए थे कि प्रधानमंत्री ने रिकॉर्डेड भाषण को लाइव के साथ चलवाया था। इसके बारे में नेशनल दस्तक ने दूरदर्शन में बात करने की कोशिश की। वहां डायरेक्टर से लेकर असाइनमेंट हैड की तरफ से कोई भी सत्येंद्र मुरली के दावों पर बात करने को तैयार नहीं है। सभी तरफ से टालमटोल किया जा रहा है। 

Satyendra

गौरतलब है कि गुरुवार को पत्रकार सत्येंद्र मुरली ने पूरी जिम्मेदारी के साथ कहा था कि पीएम मोदी का अभिभाषण रिकॉर्डेड नहीं था। उन्होंने लाइव कुछ भी नहीं कहा था। साथ ही उनका आरोप है कि इस भाषण में बाकायदा एडिटिंग भी की गई थी। 
 
बता दें, ‘राष्ट्र के नाम संदेश’ देते हुए पीएम मोदी ने कहा था कि आज मध्य रात्रि यानी 8 नवंबर 2016 की रात्रि 12 बजे से वर्तमान में जारी 500 रुपये और 1,000 रुपये के करेंसी नोट लीगल टेंडर नहीं रहेंगे। यह मुद्राएं कानूनन अमान्य होंगी।

मोदी सरकार ने दावा किया कि नोटबंदी का फैसला पूरी तरह गोपनीय था और इस निर्णय की घोषणा से पूर्व इसके बारे में सिर्फ प्रधानमंत्री, वित्तमंत्री समेत आरबीआई और वित्त मंत्रालय के कुछ अधिकारियों को जानकारी थी।
 
वित्त मंत्री अरुण जेटली ने मीडिया को बताया कि 8 नवंबर को शाम 6 बजे आरबीआई का प्रस्ताव आया, शाम 7 बजे कैबिनेट की बैठक बुलाई गई, जिसमें मोदी ने मंत्रियों को ब्रीफ किया और रात 8 बजे प्रधानमंत्री मोदी ने राष्ट्र को संबोधित करते हुए घोषणा कर दी।

ये भी पढ़ें : दूरदर्शन पत्रकार का दावा 8 नवंबर को नरेंद्र मोदी का 'राष्ट्र के नाम संदेश' लाइव नहीं था, बल्कि पूर्व रिकॉर्डेड किया हुआ था

पत्रकार का कहना है कि पीएम मोदी ने ‘राष्ट्र के नाम संदेश’ को मीडिया में लाइव बैंड के साथ प्रसारित करने को कहा था, जिसे देश के तमाम चैनलों ने लाइव बैंड के साथ ही प्रसारित किया। पीएम मोदी ने यह सिर्फ दिखावा किया कि मानों उन्होंने अचानक ही रात 8 बजे राष्ट्र को संबोधित किया हो।

उन्होंने कहा ‘देश की जनता को भरोसा दिलाने के लिए कि प्रधानमंत्री मोदी ने मामले को बेहद गोपनीय रखा है, इसलिए यह अचानक घोषणा वाला नाटक किया गया, लेकिन ऐसा बिल्कुल नहीं था’।

पत्रकार ने सवाल उठाते हुए कहा है कि 8 नवंबर 2016 की शाम 6 बजे आरबीआई से प्रस्ताव मंगवा लेने के एक घंटे बाद यानि  शाम 7 बजे कैबिनेट की बैठक हुई जो मात्र दिखावा थी, जिसे मोदी ने ब्रीफ किया।
 
उन्होंने कहा ‘मोदी ने कैबिनेट बैठक में बिना किसी से चर्चा किए ही अपना फैसला सुना दिया। यह वही निर्णय था जिसे पीएम मोदी पहले ही ले चुके थे और रिकॉर्ड हो चुका था। ऐसे में केंद्र सरकार द्वारा THE GOVERNMENT OF INDIA (TRANSACTION OF BUSINESS) RULES, 1961 एवं RBI Act 1934 की अनुपालना किस प्रकार की गई होगी? इस मामले में क्या राष्ट्रपति को सूचना दी गई?’
 
पीएम मोदी के खिलाफ आवाज उठाने वाले सत्येन्द्र मुरली का आरोप है कि “संविधान व नियम-कानूनों को ताक पर रखकर पीएम मोदी ने देश को गुमराह किया है और अपना तुगलकी फ़रमान थोपते हुए, देश में आर्थिक आपातकाल जैसे हालात पैदा कर दिए हैं। पीएम के फैसले के चलते देशभर में सैंकड़ों लोगों की मौत हो चुकी है।”

Courtesy: National Dastak

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